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यमुना की सफाई के लिए मेगा प्लान 9000 करोड़ खर्च करेगी सरकार, बदलेगी तस्वीर

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने और उसके पुनर्जीवन के लिए सरकार ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली सरकार वैज्ञानिक रोडमैप के आधार पर यमुना की सफाई के अभियान को आगे बढ़ा रही है। इसके तहत करीब 9,000 करोड़ रुपये की लागत से जल आपूर्ति, सीवरेज और नागरिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यमुना में बिना शोधन के गंदे पानी का प्रवाह रोकना और राजधानी के नागरिकों को स्वच्छ नदी उपलब्ध कराना है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं की कुल लागत 8,941.22 करोड़ रुपये है। इनमें 10 परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया, जबकि 33 नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। सरकार के अनुसार, इन कार्यों से दिल्ली की सीवरेज व्यवस्था मजबूत होगी और यमुना में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यमुना की सफाई दिल्लीवासियों की दशकों पुरानी मांग रही है। सरकार इस दिशा में ठोस और वैज्ञानिक उपाय अपनाते हुए काम कर रही है।उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली के प्रत्येक घर को सीवर नेटवर्क से जोड़ना, सभी प्रमुख नालों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ना और यमुना में बिना उपचारित गंदे पानी का प्रवाह पूरी तरह रोकना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है, जिससे आने वाले वर्षों में दिल्ली के लोगों को स्वच्छ, निर्मल और अविरल यमुना मिल सके।

दिल्ली सरकार की योजना के तहत राजधानी के विभिन्न इलाकों में नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा पुराने प्लांटों की क्षमता बढ़ाई जाएगी और नई सीवर लाइनें बिछाई जाएंगी।योजना में करीब 1,034 किलोमीटर नया सीवर नेटवर्क विकसित करने का प्रस्ताव है। बाहरी दिल्ली में 29 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।सरकारी जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं से 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गांवों को लाभ मिलेगा। लगभग 36.29 लाख लोगों तक बेहतर सीवरेज सुविधाएं पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

यमुना की सफाई के लिए ओखला में 124 मिलियन गैलन प्रतिदिन क्षमता वाला नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट विकसित करने की योजना है। इसके अलावा आठ मौजूदा ट्रीटमेंट प्लांटों को आधुनिक बनाया जाएगा।इन आठ संयंत्रों की संयुक्त क्षमता 78.2 एमजीडी से बढ़ाकर 140.8 एमजीडी करने का प्रस्ताव है। सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 78.5 लाख लोगों को लाभ मिलेगा।नए संयंत्रों से घरेलू और अन्य अपशिष्ट जल को उपचारित करने की क्षमता बढ़ेगी। इससे यमुना में प्रदूषित पानी का प्रवाह कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली सरकार ने इन परियोजनाओं को अगले दो से ढाई वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार, परियोजनाओं के पूरा होने के बाद नालों के माध्यम से यमुना में बिना उपचारित सीवेज पहुंचने से रोकने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।हालांकि यमुना की वास्तविक जल गुणवत्ता में सुधार परियोजनाओं के समय पर पूरा होने, संयंत्रों के नियमित संचालन और प्रदूषण नियंत्रण उपायों की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगा।

सरकार बुनियादी ढांचे के विकास के साथ जनभागीदारी को भी महत्व दे रही है। हाल ही में आयोजित यमुना सफाई अभियान में लगभग 35 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था। राजधानी के विभिन्न घाटों पर सफाई अभियान चलाकर बड़ी मात्रा में कचरा हटाया गया।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यमुना का पुनर्जीवन केवल एक सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि दिल्ली के पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।सरकार को उम्मीद है कि वैज्ञानिक योजना, आधुनिक सीवेज प्रबंधन और नागरिकों के सहयोग से यमुना को स्वच्छ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

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