
उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह आज केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और आत्मनिर्भरता के महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं।
स्व-सहायता समूहों से बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
उन्होंने बताया कि—
- स्व-सहायता समूह ग्रामीण विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
- कृषि सखी, पशुपालन सखी, बैंक सखी और उद्यम सखी जैसी व्यवस्थाओं में महिलाएं सक्रिय हैं।
- समूहों के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- महिलाओं की भागीदारी से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।
आरक्षण व्यवस्था का किया उल्लेख
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महिलाओं के लिए लागू आरक्षण व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि—
- मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।
- सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण उपलब्ध है।
- उन्होंने कहा कि संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू करने के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता भी महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विभिन्न विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि—
- गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
- महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
ऋण वितरण से बढ़ेगा स्वरोजगार
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार गतिविधियों का विस्तार कर सकें।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की वित्तीय सहायता से—
- छोटे उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा।
- महिलाओं की आय में वृद्धि हो सकती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।
महिला सशक्तिकरण बना सामाजिक परिवर्तन का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व-सहायता समूह केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन का भी माध्यम बन रहे हैं। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से निर्णय लेने की क्षमता, नेतृत्व कौशल और सामुदायिक सहयोग को भी बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि सहयोग और सहभागिता के माध्यम से महिलाएं नए आयाम स्थापित कर रही हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
ग्रामीण विकास में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन, उद्यमिता और सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम बने हैं। प्रशिक्षण, ऋण सुविधा और स्थानीय स्तर पर नेतृत्व के अवसर मिलने से महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय हो रही हैं।
मध्य प्रदेश में आयोजित यह कार्यक्रम भी महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और स्वावलंबन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।



