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Gomti River: गोमती को सीवेज से बचाने योगी सरकार का बड़ा प्लान, 45 नालों पर होगी कार्रवाई; बनेंगे नए STP

लखनऊ। गोमती नदी को सीवेज प्रदूषण से मुक्त करने के लिए योगी सरकार ने नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया है। योजना का मकसद शहर से निकलने वाले सीवेज को सीधे नदी में जाने से रोकना है। इसके लिए नालों की टैपिंग, फ्लो डायवर्जन, मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता बढ़ाने और नए एसटीपी स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

ड्रोन सर्वे में गोमती में गिरने वाले 12 नए नालों की पहचान होने के बाद अब कुल 45 नालों के सीवेज प्रबंधन पर काम किया जाएगा। सरकार की योजना इन नालों के डिस्चार्ज को व्यवस्थित तरीके से एसटीपी तक पहुंचाकर उसका शोधन करने की है।

ड्रोन सर्वे में सामने आए 12 नए नाले

लखनऊ में गोमती में गिरने वाले नालों की पहचान के लिए किए गए ड्रोन सर्वे में 12 ऐसे नाले सामने आए, जिनका रिकॉर्ड पहले उपलब्ध नहीं था।

इन नए नालों से निकलने वाले सीवेज को भी अब प्रबंधन योजना में शामिल किया गया है। जानकारी के मुताबिक, इन 12 नालों से करीब 75 एमएलडी डिस्चार्ज टैप किया जा चुका है।

वहीं पांच नालों में टैपिंग की आवश्यकता नहीं पाई गई। इसके अलावा 28 अनटैप्ड या आंशिक रूप से टैप्ड नालों से करीब 260 एमएलडी डिस्चार्ज होने की जानकारी सामने आई है।

लखनऊ में रोजाना कितना सीवेज निकलता है?

वर्ष 2026 के अनुमान के अनुसार लखनऊ की आबादी करीब 45.56 लाख है। शहर में 110 वार्ड और लगभग 7.52 लाख घर हैं।

इनमें करीब 4.01 लाख घर यानी लगभग 53.32 प्रतिशत घर सीवरेज नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

शहर में करीब 546.77 एमएलडी घरेलू सीवेज उत्पन्न होने का अनुमान है, जबकि वास्तविक डिस्चार्ज करीब 880.70 एमएलडी बताया गया है।

इसमें:

  • करीब 690.33 एमएलडी सीवेज नालों से प्रवाहित होता है।
  • करीब 190.71 एमएलडी सीवर नेटवर्क के जरिए जाता है।
  • बड़ी मात्रा में सीवेज के कारण नदी में प्रदूषण का खतरा बना रहता है।

45 नालों के सीवेज पर होगी कार्रवाई

लखनऊ में सीवेज के शोधन के लिए फिलहाल 10 एसटीपी स्थापित हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 629.5 एमएलडी है।

नगर निगम के रिकॉर्ड में पहले गोमती में गिरने वाले 33 नालों का उल्लेख था। लेकिन ड्रोन सर्वे के बाद 12 नए नालों की पहचान होने से अब कुल 45 नालों के सीवेज प्रबंधन को योजना में शामिल किया गया है।

इस योजना के तहत जहां जरूरत होगी वहां नालों की टैपिंग की जाएगी। इसके साथ ही सीवेज के प्रवाह को डायवर्ट कर एसटीपी तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।

160 एमएलडी से लेकर 65 एमएलडी तक के नए STP

गोमती पुनरुद्धार की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) में विभिन्न नालों को अलग-अलग एसटीपी से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है।

प्रस्तावित प्रमुख एसटीपी में शामिल हैं:

  • बसंतकुंज STP: 160 एमएलडी
  • जियामऊ STP: 150 एमएलडी
  • वजीरगंज STP: 65 एमएलडी
  • नीलमथा STP: 65 एमएलडी

इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर के अलग-अलग हिस्सों से निकलने वाले सीवेज को सीधे गोमती में जाने से रोककर उपचार संयंत्रों तक पहुंचाना है।

मॉड्यूलर और नेचर बेस्ड STP भी योजना में

गोमती के पुनरुद्धार की योजना में छोटे स्तर पर काम करने वाले मॉड्यूलर एसटीपी भी शामिल किए गए हैं।

पीपराघाट में 750 केएलडी और घैला में 100 केएलडी क्षमता वाले मॉड्यूलर एसटीपी प्रस्तावित हैं।

इसके अलावा मस्तेमऊ में नेचर बेस्ड तकनीक के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। भरवारा और दौलतगंज एसटीपी के अपग्रेडेशन को भी पुनरुद्धार योजना का हिस्सा बनाया गया है।

पहले से चल रही परियोजनाओं को भी जोड़ा गया

गोमती को प्रदूषण से बचाने के लिए कुछ परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं, जबकि कई पर काम जारी है।

जानकारी के मुताबिक, 39 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का निर्माण नवंबर 2024 में पूरा हो चुका है। इसके अलावा बरीकलां और लोनियापुरवा एसटीपी से नालों को जोड़ने की परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है।

NMCG को भेजी गई पुनरुद्धार योजना

गोमती के समेकित पुनरुद्धार की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट 6 मई 2026 को नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) को भेजी जा चुकी है।

अब प्रस्तावित योजनाओं के जरिए सीवेज के स्रोत से लेकर उसके उपचार तक एक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करने का लक्ष्य है।

अगर योजना के मुताबिक नालों की टैपिंग, फ्लो डायवर्जन और नए एसटीपी का काम प्रभावी तरीके से पूरा होता है, तो गोमती में सीधे गिरने वाले सीवेज की मात्रा कम करने में मदद मिल सकती है। इससे नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने और उसके पारिस्थितिक तंत्र को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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