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SGB में ₹1 लाख बने ₹4.44 लाख! 14 अगस्त को रिडेम्पशन का मौका, लेकिन पैसा निकालने से पहले जान लें टैक्स का पूरा खेल

नई दिल्ली। सोने में निवेश करने वाले Sovereign Gold Bond (SGB) निवेशकों के लिए 14 अगस्त 2026 अहम तारीख है। 2019-20 सीरीज III के निवेशकों को आज तय शर्तों के तहत समय से पहले रिडेम्पशन का मौका मिल रहा है। इस सीरीज के लिए RBI ने ₹15,310 प्रति यूनिट रिडेम्पशन मूल्य तय किया है।

यानी जिन निवेशकों ने उस समय करीब ₹3,449 प्रति ग्राम के प्रभावी इश्यू प्राइस पर ऑनलाइन भुगतान के जरिए SGB खरीदा था, उनके निवेश की वैल्यू कई गुना बढ़ चुकी है।

₹1 लाख का निवेश करीब ₹4.44 लाख हुआ

मान लीजिए किसी निवेशक ने ऑनलाइन छूट के बाद ₹3,449 प्रति ग्राम के भाव पर ₹1 लाख का निवेश किया था। इस रकम से लगभग 28.99 यूनिट SGB खरीदी जा सकती थीं।

अब ₹15,310 प्रति यूनिट के रिडेम्पशन मूल्य के हिसाब से इन यूनिट्स की कीमत लगभग ₹4.44 लाख बैठती है।

इस तरह केवल सोने की कीमत में बढ़ोतरी से करीब ₹3.44 लाख का अंतर बनता है। इसमें SGB पर मिलने वाला ब्याज शामिल नहीं है।

निवेश का मोटा हिसाब

  • शुरुआती निवेश: करीब ₹1 लाख
  • प्रभावी इश्यू प्राइस: ₹3,449 प्रति ग्राम
  • रिडेम्पशन मूल्य: ₹15,310 प्रति यूनिट
  • अनुमानित मौजूदा वैल्यू: करीब ₹4.44 लाख
  • कीमत बढ़ने से अंतर: करीब ₹3.44 लाख
  • इसके अलावा 2.5% सालाना SGB ब्याज

यानी सात साल की अवधि में निवेशक को सोने की कीमत बढ़ने के साथ नियमित ब्याज का भी फायदा मिला।

SGB में 2.5% सालाना ब्याज भी मिलता है

SGB की सबसे खास बात यह है कि इसमें सिर्फ सोने की कीमत बढ़ने का फायदा नहीं मिलता। निवेशकों को बॉन्ड के मूल मूल्य पर 2.5% सालाना निश्चित ब्याज भी मिलता है।

यह ब्याज आम तौर पर छह-छह महीने के अंतराल पर भुगतान किया जाता है। इसलिए ऊपर बताए गए ₹4.44 लाख के अनुमान में अब तक प्राप्त ब्याज को जोड़ने पर कुल प्राप्त लाभ और अधिक हो सकता है।

रिडेम्पशन कीमत कैसे तय होती है?

SGB के रिडेम्पशन मूल्य का निर्धारण सीधे किसी एक दिन के सोने के भाव से नहीं किया जाता। RBI के नियमों के मुताबिक कीमत रिडेम्पशन तारीख से पहले के तीन कारोबारी दिनों में 999 शुद्धता वाले सोने के बंद भाव के साधारण औसत के आधार पर तय होती है।

इन सोने की कीमतों के लिए India Bullion and Jewellers Association (IBJA) की दरों का इस्तेमाल किया जाता है।

क्या आज SGB बेच देना चाहिए?

यही सबसे बड़ा सवाल है। सिर्फ इसलिए कि निवेश चार गुने से ज्यादा हो गया है, तुरंत रिडीम करना हर निवेशक के लिए जरूरी नहीं है।

फैसला लेने से पहले इन बातों पर गौर करें:

  • आपको अभी पैसे की जरूरत है या नहीं।
  • सोने में आगे भी निवेश बनाए रखना चाहते हैं या नहीं।
  • रिडेम्पशन पर लागू टैक्स का प्रभाव कितना होगा।
  • आपके पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा कितना है।
  • अगर पैसा निकालते हैं तो उसे कहां निवेश करेंगे।
  • आपके SGB की मूल मैच्योरिटी तारीख क्या है।

सबसे जरूरी बात: टैक्स नियम जरूर समझें

SGB से मिले बड़े रिटर्न को देखते हुए टैक्स को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। आपके दिए गए विवरण के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से SGB के कैपिटल गेन्स टैक्स नियमों में बदलाव हुआ है और समय से पहले रिडेम्पशन तथा मैच्योरिटी तक होल्ड करने के बीच टैक्स ट्रीटमेंट अलग हो सकता है।

इसलिए केवल सात साल तक SGB रखने का मतलब यह नहीं है कि समय से पहले रिडेम्पशन पर आपको वही टैक्स छूट मिलेगी जो निर्धारित मैच्योरिटी तक रखने पर मिल सकती है।

खास तौर पर जिन निवेशकों ने SGB को सेकेंडरी मार्केट से खरीदा है, उनके लिए नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए रिडेम्पशन से पहले अपनी खरीद की तारीख, मूल इश्यू में सब्सक्रिप्शन और मैच्योरिटी तारीख की जांच करना जरूरी है।

SGB की पूरी मैच्योरिटी कब होती है?

SGB की सामान्य अवधि 8 साल होती है। हालांकि, निवेशकों को पांच साल पूरे होने के बाद ब्याज भुगतान वाली निर्धारित तारीखों पर समय से पहले रिडेम्पशन का विकल्प मिलता है।

इसलिए 2019-20 सीरीज III के निवेशक के सामने मूल मैच्योरिटी तक इंतजार करने या उपलब्ध विंडो में रिडीम करने का विकल्प हो सकता है।

रिडीम करने से पहले ये 5 चीजें चेक करें

  1. अपनी यूनिट की संख्या देखें।
  2. RBI का घोषित रिडेम्पशन मूल्य जांचें।
  3. अब तक मिला 2.5% ब्याज जोड़कर कुल रिटर्न निकालें।
  4. टैक्स देनदारी की गणना करें।
  5. तय करें कि रिडीम करने के बाद पैसा कहां लगाया जाएगा।

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