
दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार बिजली उपभोक्ताओं को बिजली सब्सिडी छोड़ने का विकल्प देने पर विचा कर रही है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि प्रस्तावित नए सिस्टम के तहत उपभोक्ताओं को बिजली सब्सिडी तभी मिलेगी, जब वे इसे लेने का विकल्प चुनेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ी है। इसके चलते सरकार पर बिजली सब्सिडी का वित्तीय बोझ भी काफी बढ़ गया है। ऐसे में सब्सिडी व्यवस्था में बदलाव कर खर्च को नियंत्रित करने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
हर साल सब्सिडी जारी रखने के लिए कराना होगा रजिस्ट्रेशन
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बिजली सब्सिडी व्यवस्था में बदलाव के तहत जल्द ही एक नई वेबसाइट तैयार की जाएगी। इसके जरिए आर्थिक रूप से सक्षम उपभोक्ता अपनी इच्छा से मौजूदा बिजली सब्सिडी छोड़ सकेंगे। वहीं, जो उपभोक्ता सब्सिडी वाली बिजली का लाभ जारी रखना चाहते हैं, उन्हें इसके लिए हर वित्तीय वर्ष में दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य सब्सिडी का लाभ उन्हीं उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है, जो वास्तव में इसका लाभ लेना चाहते हैं।

200 यूनिट तक मुफ्त बिजली
दिल्ली में मौजूदा बिजली सब्सिडी योजना के तहत महीने में 200 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली दी जाती है। वहीं, 201 से 400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। इस सब्सिडी की अधिकतम सीमा 800 रुपये निर्धारित है।
बजट में बिजली सब्सिडी के फंड में कटौती
पिछले एक दशक में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ दिल्ली सरकार पर बिजली सब्सिडी का बोझ भी दोगुने से अधिक हो गया है। सरकार के मुताबिक, फरवरी 2026 तक बिजली सब्सिडी के लिए आवंटित राशि 4,037.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। वहीं, मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दिल्ली सरकार ने बिजली सब्सिडी के मद में 3,500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। यानी पिछले आवंटन की तुलना में इस मद में करीब 537.63 करोड़ रुपये की कमी की गई है।
दिल्ली में 73 लाख से ज्यादा घरेलू बिजली उपभोक्ता
पिछले एक दशक में दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में राजधानी में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 73 लाख से अधिक है। ताजा आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, कुल बिजली उपभोक्ताओं में सबसे बड़ा हिस्सा घरेलू श्रेणी का है, जो 84.1 फीसदी है। वहीं, CAG की रिपोर्ट में बिजली सब्सिडी योजना को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सब्सिडी का लाभ समाज के जरूरतमंद और वंचित वर्गों तक अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच सका। इसके पीछे बड़ी वजह यह बताई गई कि सब्सिडी पाने वाले अधिकांश लाभार्थी अधिक बिजली खपत वाले वर्ग में शामिल थे।


