Featureराष्ट्रीय

MP कैबिनेट का बड़ा फैसला: 24,500 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी, सुगम ट्रांसपोर्ट स्कीम को हरी झंडी

भोपाल। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को करीब 24,500 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और परिवहन से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री चेतन्य कश्यप ने फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने राज्य में व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से ‘सुगम ट्रांसपोर्ट स्कीम’ को भी मंजूरी दी है।

राज्य में सार्वजनिक बस परिवहन की व्यवस्थित व्यवस्था को फिर से मजबूत करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक बस नेटवर्क करीब 21 साल बाद नए स्वरूप में दोबारा शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत पहले चरण में 351 बसें शुरू की गई हैं, जिनमें इंटरसिटी और इंट्रासिटी सेवाएं शामिल हैं।

कैबिनेट के अहम फैसलों में 105 किलोमीटर लंबे दमोह-कटनी सड़क मार्ग के निर्माण का प्रस्ताव भी शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य दोनों जिलों के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करना और यात्रियों तथा माल परिवहन को अधिक सुगम बनाना है। सड़क परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण से जुड़े अगले चरणों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

24,500 करोड़ रुपये के विकास प्रस्तावों में आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर बड़ा जोर दिया गया है। राज्य सरकार सड़क, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट को एक साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सरकार का मानना है कि बड़े निर्माण कार्यों के साथ सार्वजनिक सेवाओं में निवेश से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को फायदा मिलेगा।

सुगम ट्रांसपोर्ट स्कीम को कैबिनेट के प्रमुख फैसलों में शामिल किया गया है। इसका मकसद गांवों और शहरों के बीच बेहतर बस कनेक्टिविटी तैयार करना और यात्रियों को सुरक्षित, नियमित तथा आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। राज्य सरकार ने पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को इंटरसिटी और इंट्रासिटी सेवाओं से जोड़ने की शुरुआत की है।

योजना के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य पहले साल में करीब 1,500 बसों का संचालन करना है और आगे चलकर 2031 तक बसों की संख्या 15,000 तक पहुंचाने की योजना है। बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी शामिल है।

बसों की निगरानी के लिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बसों की लोकेशन, समय और संचालन की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी। यात्रियों के लिए सूचना प्रणाली और शिकायत निवारण की व्यवस्था भी इस सार्वजनिक परिवहन मॉडल का हिस्सा है।

राज्य सरकार ने सुगम परिवहन सेवा को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक विस्तार देने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने राज्य की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक इस सेवा का विस्तार करने की बात कही है। इसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में भी नियमित बस सुविधा उपलब्ध कराना है जहां अभी सार्वजनिक परिवहन के विकल्प सीमित हैं।

कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों से जुड़े प्रस्तावों पर भी निर्णय लिए गए। सरकार ने विकास योजनाओं में सामाजिक क्षेत्र की जरूरतों को शामिल करते हुए अलग-अलग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनका मकसद आधारभूत सुविधाओं के साथ नागरिक सेवाओं को भी मजबूत करना है।

सिंचाई से जुड़े प्रस्ताव भी कैबिनेट की मंजूरी में शामिल हैं। प्रदेश में कृषि पर बड़ी आबादी निर्भर होने के कारण सिंचाई क्षमता बढ़ाने को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया है। नई परियोजनाओं के जरिए कृषि क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बेहतर करने की दिशा में काम किया जाएगा।

दमोह-कटनी सड़क परियोजना को भी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 105 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण से दोनों जिलों के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है। बेहतर सड़क बनने से बस और मालवाहक वाहनों के संचालन में भी सुविधा मिल सकती है।

सड़क परियोजनाओं से आसपास के कस्बों और ग्रामीण इलाकों को भी फायदा मिलने की संभावना है। नई और बेहतर सड़कें बनने से बाजार, स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षण संस्थान और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान हो सकती है।

कैबिनेट के फैसलों में युवाओं और रोजगार से जुड़े कदम भी शामिल किए गए हैं। सरकार ने अग्निवीरों के लिए कुछ वर्दीधारी पदों की भर्ती में 20 प्रतिशत आरक्षण देने के निर्णय को भी मंजूरी दी है। इनमें वनरक्षक, पुलिस आरक्षक, एसएएफ सशस्त्र आरक्षक, जेल प्रहरी और आबकारी आरक्षक जैसे पद शामिल हैं।

राज्य सरकार के अनुसार विकास योजनाओं को मंजूरी देने का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ निवेश बढ़ाना है। परिवहन व्यवस्था मजबूत होने से शहर और गांव बेहतर तरीके से जुड़ेंगे, वहीं सड़क और सिंचाई परियोजनाएं आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद कर सकती हैं।

मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नए स्वरूप में शुरू करने की प्रक्रिया 25 सितंबर से आगे बढ़ चुकी है। भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के उद्घाटन के दौरान 351 बसों को हरी झंडी दिखाई गई थी। राज्य में लगभग 21 वर्ष बाद व्यापक सार्वजनिक बस नेटवर्क को फिर से सक्रिय किया गया है।

इस व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा को भी प्रमुखता दी गई है। तकनीक आधारित निगरानी, लाइव ट्रैकिंग और पैनिक बटन जैसी सुविधाओं के जरिए बस यात्रा को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की योजना है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विभिन्न विभाग स्वीकृत परियोजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। इनमें वित्तीय प्रावधान, तकनीकी प्रक्रिया, निर्माण कार्य और प्रशासनिक मंजूरियां शामिल होंगी।

करीब 24,500 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी देकर राज्य सरकार ने सड़क, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश की दिशा तय की है। इनमें सुगम ट्रांसपोर्ट स्कीम और 105 किलोमीटर लंबी दमोह-कटनी सड़क परियोजना प्रमुख फैसलों में शामिल हैं।

सरकार का फोकस अब इन योजनाओं को जमीन पर लागू करने और आम लोगों तक इनका लाभ पहुंचाने पर रहेगा। सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से लेकर सड़क संपर्क और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने तक, कैबिनेट के ये फैसले आने वाले समय में प्रदेश के विकास कार्यों की दिशा तय करेंगे।

Related Articles

Back to top button