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नशा और शराब माफिया पर मोहन यादव का सख्त रुख, 2029 तक नशामुक्त मध्य प्रदेश का लक्ष्य; पुलिस में 22,500 भर्तियों की तैयारी

भोपाल। मध्य प्रदेश में अपराध, संगठित गिरोहों और नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई की नीति दोहराई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार अपराधियों और माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे बिना किसी दबाव के कानून के अनुसार कार्रवाई करें और आम जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

मुख्यमंत्री मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को भोपाल के भौंरी स्थित मध्य प्रदेश पुलिस अकादमी में आयोजित 44वें और 45वें बैच के उप पुलिस अधीक्षकों के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने प्रशिक्षण पूरा करने वाले अधिकारियों को बधाई दी और पुलिस सेवा में अनुशासन, ईमानदारी तथा संवेदनशीलता के महत्व पर जोर दिया।

2029 तक मध्य प्रदेश को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में डकैतों और नक्सलियों के खिलाफ लंबे समय तक अभियान चलाए गए हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रयासों से इन चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। अब नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

उन्होंने पुलिस अधिकारियों से नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क को खत्म करने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने को कहा। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2029 तक मध्य प्रदेश को नशे की समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य भी दोहराया।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री का सबसे अधिक असर युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

नशे के खिलाफ सरकार की प्राथमिकताएं:

  • नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाना।
  • अवैध बिक्री और वितरण से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई।
  • युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता।
  • मादक पदार्थों के कारोबार में शामिल गिरोहों पर कानूनी शिकंजा।
  • वर्ष 2029 तक नशामुक्त प्रदेश का लक्ष्य।

शराब माफिया के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अवैध शराब के कारोबार को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना से कहा कि प्रदेशभर में अवैध शराब का कारोबार करने वाले गिरोहों के खिलाफ निडर होकर कार्रवाई की जाए।

उन्होंने साफ कहा कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने क्षेत्र में अपराध और अवैध गतिविधियों पर लगातार नजर रखें।

पुलिस अधिकारियों को सोशल मीडिया पर रील बनाने के बजाय जनता की सेवा की सलाह

दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने नए पुलिस अधिकारियों को सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करना आसान हो गया है, लेकिन पुलिस अधिकारियों की असली जिम्मेदारी जनता की समस्याओं का समाधान करना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया पर रील बनाने से ज्यादा ध्यान नागरिकों की शिकायतों और परेशानियों को दूर करने पर दें।

उन्होंने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारी और सेवा का भी प्रतीक है। पुलिसकर्मियों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि समाज के सभी वर्गों में उनके प्रति विश्वास और सम्मान पैदा हो। कमजोर और जरूरतमंद लोगों को पुलिस से सुरक्षा और सहायता का भरोसा मिलना चाहिए।

तीन साल में 17,710 पुलिस भर्तियां, 22,500 पदों का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पुलिस बल को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में पुलिस विभाग के विभिन्न पदों पर 17,710 भर्तियां की गई हैं। सरकार का लक्ष्य कुल 22,500 पदों पर भर्ती करना है।

नए पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति और बेहतर प्रशिक्षण से कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार पुलिसकर्मियों के कल्याण, पदोन्नति और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं पर भी ध्यान दे रही है।

समारोह में नक्सल विरोधी अभियानों में योगदान देने वाले 63 पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न पदोन्नति दिए जाने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने इन जवानों के साहस और योगदान की सराहना की।

पुलिस अकादमी में 12 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा

मुख्यमंत्री ने पुलिस अकादमी में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए करीब 12 करोड़ रुपये के कार्यों की घोषणा की। इसमें नए ऑडिटोरियम का निर्माण, विद्युत सब स्टेशन की स्थापना और एक किलोमीटर लंबी संपर्क सड़क का निर्माण शामिल है।

इन सुविधाओं से पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण और अन्य गतिविधियों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

48 नए अधिकारियों में 20 महिलाएं, रेडियो संवर्ग के DSP भी शामिल

कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने भी प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नशे का बढ़ता चलन और साइबर अपराध पुलिस के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं।

डीजीपी के अनुसार, प्रशिक्षण पूरा करने वाले 48 नए अधिकारियों में 20 महिला अधिकारी शामिल हैं। इस बार पहली बार रेडियो संवर्ग के डीएसपी स्तर के अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें कई अधिकारी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं, जिनकी तकनीकी विशेषज्ञता साइबर और अन्य तकनीकी अपराधों से निपटने में उपयोगी हो सकती है।

उन्होंने पुलिस के जागरूकता अभियानों की जानकारी देते हुए बताया कि साइबर अपराध के प्रति लोगों को सतर्क करने के लिए ‘सेफ क्लिक’ अभियान चलाया जा रहा है। वहीं, युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई जा रही है।

पुलिस के सामने साइबर अपराध और नशा बड़ी चुनौती

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शांति, सुरक्षा और कानून का शासन बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। नए अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे अपराध नियंत्रण के साथ-साथ जनता का विश्वास जीतने पर भी ध्यान दें।

पुलिस के सामने अब पारंपरिक अपराधों के अलावा साइबर ठगी, ऑनलाइन अपराध और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियां भी हैं। ऐसे में तकनीकी दक्षता, बेहतर प्रशिक्षण और जनता के साथ संवाद की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराध और माफिया के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर निष्पक्षता और दृढ़ता से की जाए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 2029 तक नशामुक्त मध्य प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से जमीनी स्तर पर कौन-कौन से कदम उठाए जाते हैं।

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