
रायपुर। एकात्म मानववाद के प्रवर्तक अंत्योदय के प्रणेता एवं महान चिन्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि 11 फरवरी जो की भारतीय जनता पार्टी समर्पण दिवस के रूप में आज भाजपा जिला कार्यालय एकात्म परिसर रायपुर में मनाया गया एवं पं. दीनदयाल जी का पुण्य स्मरण किया गया।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर ने पं. दीनदयाल जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके विचारों पर चलते हुये उनके द्वारा लगाया हुआ भारतीय जनता पार्टी नामक पौधा एक विशाल वट वृक्ष के रूप में आकार ले चूका है | पं. दीनदयाल जी के विचारों को लेकर ही पिछले 12 वर्षों से देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास का ध्येय मंत्र को लेकर भारत को विकास की नयी उचाईयों पर ले जा रहे है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ट विधायक अजय चंद्राकर ने कहा की पं. दीनदयाल जब 35 वर्ष की आयु में जनसंघ का निर्माण कर रहे थे उस समय लोग उनका मजाक उड़ाते थे वही जनसंघ आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में देश में व देश के अधिकतर राज्यों में अपनी सरकार चला है | उन्होंने कहा की 22 अप्रैल 1965 में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी ने अपने भाषण में पहली बार एकात्म मानववाद का विषय सबके बीच में रखा | द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप में जब साम्यवाद और पूंजीवाद का जन्म हुआ उस समय पंडित दीनदयाल जी ने भारत को धर्म और संस्कृति आधारित विचार को लेकर समाजवाद जिसमे सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्वतंत्रता हो एवं एकात्म मानववाद के विषय पर जोर दिया | पंडित दीनदयाल जी का मानना था की राष्ट्र धर्म निरपेक्ष नहीं अपितु पंथ निरपेक्ष होना चाहिए, राष्ट्र एक जमीन का टुकड़ा मात्र नहीं है एक जीवंत इकाई है | राजनीति धर्म तत्व एवं नैतिकता आधारित मूल्यों पर होना चाहिए अर्थव्यवस्था में अंत्योदय आधारित योजनाये बननी चाहिए जो नीचे से ऊपर की ओर सम्पादित होना चाहिए | पं. दीनदयाल जी ने अंत्योदय से भूखे एवं बेरोजगारों के उत्थान तथा स्वदेशी से आत्मनिर्भरता की बात की | चंद्राकर जी ने कहा की भाजपा सरकार की छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खाद्यान सुरक्षा योजना, कौशल उन्नयन हो, स्वनिधि योजना हो, हेल्थ स्मार्ट कार्ड योजना जैसी कई ऐसी योजनाये बनाई जो अंत्योदय के विचारों से प्रभावित थी।
कार्यक्रम के वक्ता सांसद संतोष पाण्डेय ने एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय के सूत्रधार पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन पर प्रकाश डाला उन्होंने बताया की गरीबी एवं अभाव के बाद भी कड़े संघर्ष करते हुए उन्होंने अपनी शिक्षा पूर्ण की | प्रथम श्रेणी में प्रशासनिक परीक्षा प्रथम स्थान से पास करने के बाद भी उन्होंने देश सेवा को प्रथम मानते हुए नौकरी नहीं की उनके लिए देश ही सर्वोपरि था वे अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का विकास हो ऐसी प्रेरणा के साथ 1937 में श्री सुन्दर सिंह भंडारी से मिलने के पश्चात उनका राष्ट्रीय स्वयं संघ से संपर्क में आये | अपने सभी अंकसूची एवं सर्टिफिकेट को जलाकर सारे बंधन से मुक्त होकर अपने आप को राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया | वे पांचजन्य राष्ट्रधर्म एवं स्वदेश समाचार पत्र के संपादक भी रहे | उन्होंने हम सभी कार्यकर्ताओं को पं.दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों एवं उनके आदर्शो को ग्रहण करें आज समर्पण दिवस के दिन सच्ची श्रद्धांजलि होगी।



