
रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को लेकर एक गंभीर लापरवाही और अनियमितता का मामला सामने आया है। रायपुर जिले के आरंग विकासखंड अंतर्गत भलेरा सहकारी समिति में धान की बोरियों में पाइप के जरिए पानी डालने की घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। मामले में समिति के चार कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी तैयारी की जा रही है।
दरअसल, धान की बोरियों में पानी डालने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिला। किसानों का आरोप है कि धान की बोरियों का वजन बढ़ाने के लिए जानबूझकर उनमें पानी डाला जा रहा था, जिससे सरकारी खरीदी व्यवस्था में गड़बड़ी की जा सके। वीडियो वायरल होने के बाद बुधवार सुबह बड़ी संख्या में किसान भलेरा समिति पहुंचे और समिति परिसर के सामने धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। किसानों का कहना था कि ऐसी हरकतों से न सिर्फ सरकारी व्यवस्था बदनाम होती है, बल्कि ईमानदारी से धान बेचने वाले किसानों के साथ भी अन्याय होता है।
किसानों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने तत्काल जांच के लिए एक टीम गठित की। जांच दल में आरंग विकासखंड के सहकारिता विस्तार अधिकारी सुमित डडसेना, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के शाखा प्रबंधक नरेंद्र चंद्राकर और प्राधिकृत अधिकारी लीलूराम साहू शामिल थे। जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट संबंधित आयुक्त को सौंप दी। जांच में प्रथम दृष्टया कर्मचारियों की लापरवाही और अनियमितता सामने आने के बाद समिति में कार्यरत चार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में समिति प्रबंधक विष्णु साहू, लिपिक उमेश साहू, चौकीदार इंदरमन निषाद और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी जितेंद्र कुमार साहू शामिल हैं। इन सभी को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है।
सहकारिता विस्तार अधिकारी सुमित डडसेना ने बताया कि किसानों से मिली शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर पूरे मामले की जांच की गई है। जांच रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमों के तहत एफआईआर दर्ज करने की भी तैयारी की जा रही है। यदि आरोप साबित होते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।इस घटना के बाद धान खरीदी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। किसान संगठनों ने मांग की है कि प्रदेशभर की समितियों में भी सख्ती से निगरानी की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।



