
उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख वस्त्र और परिधान केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा कदम उठाया है। लखनऊ में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने हथकरघा, वस्त्रोद्योग और खादी विभाग के कार्यों की विस्तार से समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की पहचान को और मजबूत बनाने के लिए कौशल विकास, आधुनिक तकनीक और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कहा कि राज्य के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और उद्योगों की मांग पूरी करने के लिए प्रशिक्षित एवं दक्ष मानव संसाधन तैयार करना बेहद जरूरी है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरी तरह रोजगारपरक बनाया जाना चाहिए।
उद्योगों की जरूरतों के अनुसार होगा प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को वर्तमान औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपडेट किया जाए। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए ऑटोमेशन और टेक्निकल टेक्सटाइल्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रशिक्षण संस्थानों, उद्योगों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार के अवसर आसानी से मिल सकें।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रोजगारोन्मुख बनाया जाए।
- उद्योगों की मांग के अनुसार कौशल विकास हो।
- ऑटोमेशन और टेक्निकल टेक्सटाइल्स पर विशेष फोकस किया जाए।
- उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाया जाए।
- तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की जाए।
प्रशिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशिक्षण प्रणाली में गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी की जाए ताकि युवाओं को बेहतर कौशल और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके।
मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि प्रशिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी तो राज्य के उद्योगों को कुशल कार्यबल मिलेगा और रोजगार सृजन में तेजी आएगी।
माटीकला को मिलेगा नया प्रोत्साहन
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने माटीकला को उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि माटीकला न केवल पारंपरिक कला है बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन भी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि माटीकला उत्पादों के उपयोग और विपणन को बढ़ावा दिया जाए ताकि कारीगरों की आय में वृद्धि हो सके।
कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक डिजाइन और नई तकनीकों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
इसके लिए उन्होंने निर्देश दिए कि:
- कारीगरों को आधुनिक डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जाए।
- सोलर चाक जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाए।
- बेहतर उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
- वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर फोकस
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उनका कहना है कि स्वरोजगार और कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है।
यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो हजारों युवाओं और कारीगरों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल सकते हैं।



