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ममता बनर्जी को कलकत्ता HC से बड़ी राहत, TMC के 3 बैंक खातों से खर्च जारी रखने की मिली अनुमति

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर जारी विवाद के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने पार्टी के तीन बैंक खातों से रोजमर्रा के खर्च करने की अंतरिम व्यवस्था को आगे भी जारी रखने की अनुमति दी है।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सोमवार को पहले दिए गए आदेश को बढ़ाते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को तीन बैंक खातों से पार्टी के दैनिक खर्च करने की अनुमति दी। यह व्यवस्था अब 29 जनवरी 2027 तक जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई भी इसी अवधि के आसपास निर्धारित की गई है।

चुनाव चिन्ह विवाद के बीच आया आदेश

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘घास पर दो फूल’ चुनाव चिन्ह को आगामी उपचुनावों के लिए फ्रीज कर दिया था।

आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह दिए हैं। यह व्यवस्था नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों के संदर्भ में की गई है।

हाईकोर्ट ने हालांकि स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के इस अंतरिम आदेश से उसके पहले के बैंक खातों संबंधी आदेश पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ता।

तीन बैंक खातों से कैसे होगा खर्च?

ममता बनर्जी गुट को इन तीन खातों से धन निकालने की अनुमति सीधे और बिना निगरानी के नहीं दी गई है। कोर्ट की पहले की व्यवस्था के मुताबिक खातों के संचालन में विशेष अधिकारी की भूमिका बनी रहेगी।

व्यवस्था के प्रमुख बिंदु:

  • तीन बैंक खातों से पार्टी के रोजमर्रा के खर्च किए जा सकेंगे।
  • अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में से कोई भी दो व्यक्ति चेक पर हस्ताक्षर कर सकेंगे।
  • चेक को अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
  • विशेष अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर के बाद बैंक से भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
  • धन का इस्तेमाल पार्टी के दैनिक संचालन और निर्धारित कानूनी खर्चों के लिए किया जाना है।

पहले पुलिस ने फ्रीज किए थे खाते

इन तीन बैंक खातों को पश्चिम बंगाल पुलिस ने शिकायत के बाद डेबिट-फ्रीज किया था। शिकायत में खातों में कथित तौर पर अवैध लेनदेन से जुड़े धन के होने के आरोप लगाए गए थे।

इसके बाद ममता बनर्जी गुट ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। 9 जुलाई 2026 को अदालत ने तीनों खातों से पार्टी के दैनिक खर्चों के संचालन के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किया था। उस समय अदालत ने भी स्पष्ट किया था कि खातों का इस्तेमाल पार्टी के रोजमर्रा के संचालन के लिए किया जा सकता है।

चुनाव आयोग के फैसले का क्या है असर?

हाईकोर्ट के सामने राज्य सरकार और दूसरे गुट की ओर से यह तर्क दिया गया कि चुनाव आयोग द्वारा पार्टी के नाम और पुराने चुनाव चिन्ह को लेकर अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद ममता गुट के पास इन खातों को संचालित करने का अधिकार नहीं रहना चाहिए।

दूसरी ओर, ममता गुट की ओर से कहा गया कि पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर मूल विवाद अभी चुनाव आयोग के समक्ष लंबित है। हाईकोर्ट ने फिलहाल अपने पहले के आदेश को जारी रखा है।

अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि चुनाव आयोग का 17 सितंबर का आदेश अंतरिम प्रकृति का है और उपचुनावों के संदर्भ में लागू किया गया है। पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम अधिकार का विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

28 साल पुराना चुनाव चिन्ह भी विवाद में

ममता बनर्जी ने वर्ष 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बाद ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘घास पर दो फूल’ वाला चुनाव चिन्ह पार्टी की पहचान का प्रमुख हिस्सा रहा है।

अब पार्टी के भीतर गुटीय विवाद के चलते यही नाम और चुनाव चिन्ह चुनाव आयोग के समक्ष विवाद का विषय बना हुआ है। आगामी उपचुनावों के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और प्रतीक आवंटित किए गए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी वाला चुनाव चिन्ह दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को अलग नाम और प्रतीक मिला है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल कलकत्ता हाईकोर्ट का बैंक खातों से जुड़ा अंतरिम आदेश ममता बनर्जी गुट के लिए जारी रहेगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए जनवरी 2027 की तारीख तय की है।

वहीं पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग के समक्ष लंबित है। इसलिए बैंक खातों के संचालन और पार्टी के आधिकारिक नाम-चुनाव चिन्ह का विवाद फिलहाल अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में हाईकोर्ट का ताजा आदेश ममता बनर्जी गुट को पार्टी के रोजमर्रा के वित्तीय संचालन के लिहाज से राहत देता है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर अंतिम स्थिति अभी तय होना बाकी है।

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