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उत्तर प्रदेश में एआई मिशन का आगाज: 65 डेटा लैब की शुरुआत, सीएम योगी का ऐलान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को यूपी में एआई मिशन लागू करने का ऐलान किया। ‘एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस’ का उद्घाटन करते हुए योगी ने कहा कि एआई मिशन से तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से लगभग 2000 करोड़ के कार्यक्रम लागू होंगे। यूपी स्वास्थ्य सेवाओं में एआई प्रयोग में अग्रणी होगा। यहां 62, एआई डाटा लैब (कुल 65) बनेंगी, जो छोटे शहरों में स्थापित होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई शासन को प्रतिक्रियात्मक (रिएक्टिव) से सक्रियात्मक (प्रोएक्टिव) बना रहा है। तकनीक जब संवेदना से जुड़ती है , नीति नवाचार से संचालित होती है और शासन जब विश्वास पर आधारित होता है, तभी विकास समावेशी बनता है और भविष्य सुरक्षित होता है। स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के प्रयोग से स्वास्थ्य नीतियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। एआई से महामारियों, वेक्टर जनित रोगों के संबंध में डेटा जुटाने और फीडबैक से बेहतर निर्णय, नीति और परिणाम तय किए जा सकते हैं। प्रदेश में मेडिकल डिवाइस पार्क, फार्मा पार्क, लखनऊ में मेडिटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, गौतम बुद्ध नगर में एआई एंड इनोवेशन आधारित उद्यमिता केंद्र, आईआईटी कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित करने का कार्य प्रगति पर है।

राशन घोटाले पर डिजिटल प्रहार: 30 लाख फर्जी कार्ड पकड़े गए

मुख्यमंत्री ने आठ साल पहले की स्थिति को याद करते हुए बताया कि उस समय जनता की सबसे बड़ी शिकायत राशन न मिलने की होती थी। उन्होंने कहा, “जब हमने सरकार बनाई, तो हर जिले और गांव में राशन की चोरी चरम पर थी। हमने तकनीक का सहारा लिया और 80 हजार राशन दुकानों पर छापेमारी करवाई। जांच में 30 लाख फर्जी राशन कार्ड मिले, जिनके नाम पर चोरी हो रही थी।” उन्होंने बताया कि ई-पॉश (e-PoS) मशीनें लगने के बाद आज राशन की चोरी शून्य हो गई है और यह पारदर्शिता तकनीक की ही देन है।

डीबीटी से खत्म हुआ ‘कट’ कल्चर

भ्रष्टाचार पर चोट करते हुए सीएम योगी ने कहा कि पहले निराश्रित महिलाओं को मिलने वाली 300 रुपये की पेंशन में भी बिचौलिए ‘कट’ लेते थे। आज डीबीटी (DBT) और जनधन खातों के कारण 1.06 करोड़ विधवाओं और निराश्रित महिलाओं को बिना किसी कटौती के सीधा लाभ मिल रहा है। तकनीक ने न केवल काम आसान किया है, बल्कि सरकार के प्रति जनता का विश्वास भी बढ़ाया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में AI और तकनीक की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ती आबादी के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में चुनौतियां बढ़ेंगी, लेकिन एआई के क्षेत्र में भारत दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में आए सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की दिशा में तेजी से बढ़ी है। कोविड काल में पीएम मोदी की चेतावनी के बाद प्रदेश के हर जिले में ऑक्सीजन प्लांट, आईसीयू बेड और क्रिटिकल केयर की सुविधा उपलब्ध कराई गई। तकनीक और बेहतर सर्विलांस के कारण ही 38 जिलों में फैली इंसेफेलाइटिस को नियंत्रित किया जा सका। यूपी में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत से भी नीचे लाया गया है, जिसे तकनीक के उपयोग से और भी कम करने का लक्ष्य है।

भविष्य का रोडमैप

सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि ‘डबल इंजन’ की सरकार की नीति स्पष्ट है। जिलों के डॉक्टरों को वर्चुअल आईसीयू और क्रिटिकल केयर के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। आज हर जिले में डायलिसिस, कलर डॉपलर और आईसीयू जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से अब इन सुविधाओं को और भी सटीक और सुलभ बनाया जाएगा।

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