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लकड़बग्घे की मौत के बाद वन विभाग में हड़कंप, उच्च स्तरीय जांच के आदेश

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से वन विभाग की लापरवाही का मामला सामने आया है। गुरु घासीदास नेशनल पार्क के जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण एक लकड़बग्घा अपनी जीवन रक्षा के लिए जरूरी इलाज न मिलने के कारण मर गया। इस घटना ने पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना बिहारपुर क्षेत्र के मकराद्वारी इलाके की है। लकड़बग्घा बीमार और घायल अवस्था में जंगल में भटकता पाया गया। बताया जा रहा है कि जंगल में लगी आग के कारण यह जानवर अपने प्राकृतिक आवास से बाहर आ गया था। बेजुबान और कमजोर अवस्था में लकड़बग्घा लगातार तड़प रहा था, लेकिन उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका।

स्थानीय वन अमले ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। वन्यजीव चिकित्सक छुट्टी पर होने के बावजूद पार्क प्रबंधन ने किसी वैकल्पिक डॉक्टर या इलाज की व्यवस्था नहीं की। समय पर उपचार न मिलने से लकड़बग्घा तड़प-तड़प कर दम तोड़ गया। वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। एक महीने पहले इसी नेशनल पार्क में एक तेंदुआ कुएं में गिर गया था। उचित समय पर रेस्क्यू और इलाज न मिलने के कारण उसकी मौत भी हो गई थी। लगातार ऐसी घटनाओं ने यह दिखा दिया है कि पार्क में वन्यजीवों की सुरक्षा और देखभाल के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी प्रबंधन की लापरवाही से चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित इलाज और बचाव कार्य किया जाता तो इन बेजुबान जानवरों की जान बचाई जा सकती थी। इन घटनाओं के कारण वन्यजीव संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। वन विभाग अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि पार्क में घायल या बीमार जानवरों का त्वरित इलाज किया जाए। समय पर इलाज न होने से केवल जानवरों की मौत ही नहीं होती, बल्कि यह पार्क प्रशासन की कार्यप्रणाली और वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर असर डालता है।

स्थानीय समुदाय ने अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि लगातार होने वाली इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने वन विभाग से अपील की है कि भविष्य में ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सकीय और रेस्क्यू की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल में आग, घायल जानवरों की मदद न करना और इलाज में देरी करना गंभीर अपराध के दायरे में आता है। उचित निगरानी और तत्काल कार्रवाई के अभाव में वन्यजीवों की संख्या पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गुरु घासीदास नेशनल पार्क में वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था को सुधारने की सख्त जरूरत है। समय पर उचित कदम उठाए बिना पार्क में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल है।

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