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MP Cabinet का मेगा फैसला! ₹7,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश, सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट और ड्रोन सेंटर को मिली मंजूरी

मंत्रिमंडल की बैठक में बताया गया कि अक्टूबर-नवंबर में महिला एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी 2026 का आयोजन नाथू बरखेड़ा, भोपाल में होने जा रहा है। इसमें भारत, चीन, जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड की 200 से अधिक खिलाड़ी भाग लेंगी।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एक खुशखबरी देते हुए बताया कि प्रदेश को 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के नए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। जिसमें एक सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। बैठक में भोपाल में स्थित आइसर संस्थान में ड्रोन तकनीक आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को मंजूरी दी गई। साथ ही रिहंद माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए आगामी 5 सालों के लिए लगभग 111 करोड़ रुपए की राशि का भी प्रावधान किया गया। इसके अलावा बैठक में मध्यप्रदेश में जन विश्वास अभियान की शुरुआत होने की भी जानकारी दी गई।

मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश को 7 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के नए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इस दौरान पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी, मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर परियोजना स्थापित करेगी, जिससे 6200 करोड़ रुपए का निवेश होगा और लगभग ढाई हजार से अधिक रोजगारों का सृजन होगा। इसके अलावा श्याम पॉवर कंपनी लिमिटेड 1 हजार करोड़ का निवेश करेगी, और उसका 1 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य है। इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को बधाई दी है।

ड्रोन तकनीक आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी

मीटिंग में हुए अन्य निर्णयों की जानकारी देते हुए मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंतर्गत भोपाल स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) में ड्रोन तकनीक आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि एआई आधारित ड्रोन तकनीक का यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लगभग 85.51 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा और इसका लक्ष्य प्रदेश को ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में ट्रेनिंग, रिसर्च, नवाचार, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, इंडस्ट्रीज एंप्लॉयमेंट के सृजन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

रिहंद माइक्रो सिंचाई प्रोजेक्ट के लिए 111 करोड़ का प्रावधान

मंत्रिमंडल की बैठक में जल संसाधन विभाग की 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2031 तक संचालित होने वाली योजनाओं को लगातार जारी रखने पर भी स्वीकृति दी गई। साथ ही, रिहंद माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए आगामी 5 सालों के लिए लगभग 111 करोड़ रुपए की राशि का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ग्वालियर जिले में विद्युत सुरक्षा निरीक्षालय में नवीन वृत्त कार्यालय शुरू करने और उसके लिए नवीन पदों को स्वीकृत करने की भी अनुमति दी गई है।

MP में लगेगा सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट, ड्रोन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को भी मंजूरी

हर शुक्रवार को होगा जन विश्वास अभियान का आयोजन

लोनिवि मंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश में जन विश्वास अभियान की शुरुआत हो रही है। यह अभियान प्रत्येक शुक्रवार को संचालित किया जाएगा। विभिन्न योजनाओं के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए मंत्री, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे। यह अभियान संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी का मिला-जुला स्वरूप होगा।

MP को मिला ‘बेस्ट परफॉर्मिंग लार्ज स्टेट’ श्रेणी का अवॉर्ड

मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश का मान लगातार बढ़ रहा है। इसी कड़ी में आयुष्मान भारत योजना के प्रभावी एवं उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश को ‘बेस्ट परफॉर्मिंग लार्ज स्टेट’ श्रेणी में राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि यह सम्मान बायोमैट्रिक आधारित प्री-ऑथराइजेशन प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दिया गया है।

मन की बात में पीएम ने किया ‘कैच द रेन’ अभियान का जिक्र

साथ ही उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के ​लिए एक और खुशी की बात यह रही कि इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने ‘मन की बात कार्यक्रम’ में ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत सीधी और नरसिंहपुर जिलों में जल संरक्षण की दिशा में जो कार्य हुए हैं, उनके लिए मध्य प्रदेश सरकार की सराहना की है। इस दौरान प्रधानमंत्री जी ने सीधी में निर्मित 1,500 तालाबों तथा नरसिंहपुर में विकसित अमृत सरोवरों की विशेष प्रशंसा करते हुए इन पहलों को जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया।

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