
अगर आप त्योहारी सीजन में सोने के सस्ता होने का इंतजार कर रहे हैं, तो आने वाला समय आपकी उम्मीद के मुताबिक नहीं हो सकता। दुनियाभर की बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों और संस्थागत निवेशकों ने एक बार फिर सोने पर अपना दांव बढ़ाना शुरू कर दिया है।
अमुंडी, पिक्टेट, रोबेको और फिडेलिटी जैसी बड़ी निवेश कंपनियां हाल के हफ्तों में सोने की खरीदारी बढ़ा रही हैं। इन निवेशकों का मानना है कि सोने की कीमतों को आगे भी कई मजबूत सपोर्ट मिल सकते हैं।
ऐसे में बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि सोने के दाम आने वाले महीनों में एक बार फिर बड़े स्तर पर बढ़ सकते हैं।

साल के अंत तक 5,000 डॉलर तक पहुंच सकता है सोना
रिपोर्ट के मुताबिक अमुंडी को उम्मीद है कि साल के अंत तक सोने की कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकती है।
अगर ऐसा होता है तो भारतीय बाजार में भी सोने की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर भारत में सोने का भाव करीब 2 लाख रुपये के आसपास पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
खास बात यह है कि जिन 12 से ज्यादा बड़े निवेश प्रबंधकों से बातचीत का हवाला दिया गया है, उनमें से ज्यादातर या तो सोने की खरीदारी कर चुके हैं या फिर इसके प्रति सकारात्मक रुख बनाए हुए हैं।
इन कंपनियों के पास करीब 27 खरब डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन है। इसलिए इनके निवेश फैसलों को बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फेड की सख्ती के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम
सोने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह आसान नहीं हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाया जा रहा है। ब्याज दरों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी सोने के लिए चुनौती पैदा कर सकती है।
दरअसल, सोना कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में जब बॉन्ड और दूसरी ब्याज देने वाली संपत्तियों पर रिटर्न बढ़ता है तो सोने की मांग पर दबाव आ सकता है।
इसके बावजूद लंबी अवधि के निवेशक सोने को लेकर अपना भरोसा बनाए हुए हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि सोने को आर्थिक और वित्तीय अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जाता है।
रोबेको के अर्नाउट वैन रिजन के मुताबिक सोना अब निवेश पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
गिरावट आए तो खरीदारी का मौका मान रहे निवेशक
कुछ बड़े निवेशक सोने में आने वाली गिरावट को भी खरीदारी का अवसर मान रहे हैं।
पर्मानेंट पोर्टफोलियो फंड्स के माइकल कुगिनो ने जून में सोने की कीमत के 4,000 डॉलर तक नीचे आने को खरीदारी का अच्छा मौका बताया था।
उनका मानना है कि सोने की लंबी अवधि की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सोना ऊंचे स्तरों पर अपना आधार बना सकता है।
यानी बाजार में अब सिर्फ तेजी के पीछे भागने के बजाय गिरावट में सोना खरीदने की रणनीति भी देखने को मिल रही है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बनी बड़ी वजह
सोने की कीमतों को मजबूती देने वाली सबसे बड़ी वजहों में केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी भी शामिल है।
अप्रैल से जून के बीच केंद्रीय बैंकों ने कुल 289 टन सोने की शुद्ध खरीदारी की। यह किसी भी दूसरी तिमाही के मुकाबले सबसे ज्यादा बताई गई है।
केंद्रीय बैंकों की यह खरीदारी बताती है कि वैश्विक स्तर पर सोने को लेकर रणनीतिक भरोसा अभी मजबूत है।
इसके अलावा संस्थागत निवेशकों की खरीदारी भी सोने की मांग को बढ़ाने में मदद कर रही है।
सोने पर बढ़ता दांव, डॉलर के लिए चुनौती?
कुछ निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण निवेशकों का एक हिस्सा डॉलर के बजाय सोने जैसी संपत्तियों की तरफ देख रहा है।
अमेरिप्राइज फाइनेंशियल के एंथनी सैग्लिम्बिन के अनुसार डॉलर को लेकर भरोसे से जुड़ी चिंताओं के बीच सोना और बिटकॉइन जैसे विकल्प आकर्षित कर रहे हैं।
हालांकि, इन्वेस्को के क्रिस्टोफर हैमिल्टन का मानना है कि फिलहाल डॉलर का कोई स्पष्ट विकल्प मौजूद नहीं है।
इसका मतलब है कि सोने की तेजी की कहानी सिर्फ डॉलर के कमजोर होने पर निर्भर नहीं है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, आर्थिक अनिश्चितता और निवेशकों की पोर्टफोलियो रणनीति भी इसकी कीमतों को प्रभावित कर रही है।
थोड़ी सी खरीदारी भी बढ़ा सकती है कीमत
सोने के लिए एक और महत्वपूर्ण पहलू पश्चिमी निवेशकों के पोर्टफोलियो में इसकी कम हिस्सेदारी है।
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी शेयर बाजार में मजबूत तेजी के कारण कई निवेशकों का बड़ा पैसा इक्विटी में रहा है। ऐसे में अगर वे अपने पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा भी सोने में स्थानांतरित करते हैं, तो मांग तेजी से बढ़ सकती है।
यही वजह है कि बड़े निवेशक सोने को सिर्फ महंगाई से बचाव का साधन नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने वाले एसेट के रूप में भी देख रहे हैं।
फिलहाल सोने के दाम पर ब्याज दरों, डॉलर, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर रहेगा। इसलिए 5,000 डॉलर प्रति औंस का अनुमान एक संभावित लक्ष्य है, गारंटी नहीं।
निवेशकों के लिए सोने में पैसा लगाने से पहले बाजार की स्थिति, जोखिम और अपनी निवेश क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।



