
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को लेकर योगी सरकार एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित योजना लागू होने पर राज्य की करीब 1 करोड़ महिलाओं को एक-एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज मिल सकता है। खास बात यह है कि इस योजना का लाभ स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं को देने की तैयारी की जा रही है।
विधानसभा चुनाव 2027 से कुछ महीने पहले सामने आई इस संभावित योजना ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, अभी योजना की अंतिम घोषणा, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसे सरकार की प्रस्तावित तैयारी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
तीन किस्तों में मिल सकता है 1 लाख रुपये तक का कर्ज
प्रस्तावित योजना के तहत एक महिला को अधिकतम 1 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। राशि को एक साथ देने के बजाय तीन चरणों में उपलब्ध कराने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।

संभावित किस्तों का ढांचा इस तरह हो सकता है:
- पहली किस्त: 20 हजार रुपये
- दूसरी किस्त: 30 हजार रुपये
- तीसरी किस्त: 50 हजार रुपये
- कुल प्रस्तावित राशि: 1 लाख रुपये तक
बताया जा रहा है कि पहली किस्त दिसंबर में दिए जाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, तारीख और भुगतान की अंतिम व्यवस्था की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं पर रहेगा फोकस
योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना बताया जा रहा है। सरकार ऐसी महिलाओं को विशेष क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने की तैयारी भी कर रही है।
इससे महिलाएं अपने छोटे कारोबार के लिए पूंजी जुटा सकती हैं। पहले से चल रहे काम को विस्तार देने के लिए भी इस राशि का इस्तेमाल किया जा सकता है।
ब्याज मुक्त ऋण होने के कारण महिलाओं को सामान्य बैंक लोन की तरह अतिरिक्त ब्याज का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
डिजिटल आईडी और ऑनलाइन कारोबार को भी बढ़ावा
प्रस्तावित योजना केवल कर्ज देने तक सीमित नहीं रहने वाली है। महिला समूहों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इसके लिए महिलाओं को आईडी कार्ड देने की तैयारी की जा रही है। डिजिटल सुविधाओं के माध्यम से महिला समूहों को ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स जैसे विकल्पों से जोड़ने का प्रयास किया जा सकता है।
इसका फायदा उन महिलाओं को मिल सकता है जो घर से छोटे स्तर पर उत्पाद तैयार करती हैं और उन्हें बड़े बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई होती है।
ई-रिक्शा खरीदने में भी मिल सकती है मदद
महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए ई-रिक्शा योजना को भी प्रस्तावित तैयारियों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 2 लाख रुपये तक के ई-रिक्शा की खरीद के लिए सहायता या वित्तीय व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो महिलाओं को स्वरोजगार का एक नया विकल्प मिल सकता है।
100 महिला शक्ति केंद्र बनाने की तैयारी
प्रदेश में महिलाओं को सरकारी योजनाओं और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए 100 महिला शक्ति केंद्र स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी, आर्थिक अवसर और जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकता है।
महिलाओं के लिए प्रस्तावित बड़े फायदे
- 1 करोड़ तक महिलाओं को योजना से जोड़ने की तैयारी
- प्रत्येक महिला को 1 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण का प्रस्ताव
- 20 हजार, 30 हजार और 50 हजार रुपये की तीन संभावित किस्तें
- स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं पर विशेष फोकस
- विशेष क्रेडिट कार्ड देने की तैयारी
- डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बिक्री को बढ़ावा
- ई-रिक्शा के जरिए स्वरोजगार का विकल्प
- 100 महिला शक्ति केंद्र स्थापित करने की तैयारी
2027 चुनाव से पहले क्यों अहम है योजना?
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक है। ऐसे में महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई जा रही किसी भी बड़ी आर्थिक योजना के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
एक करोड़ महिलाओं तक प्रस्तावित आर्थिक मदद पहुंचने की स्थिति में इसका असर केवल लाभार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा। उनके परिवारों तक भी इसका प्रभाव पहुंच सकता है।
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि योजना का अंतिम स्वरूप क्या होगा और वास्तव में कितनी महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा।
अभी घोषणा का इंतजार
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 1 करोड़ महिलाओं को 1 लाख रुपये देने की योजना अभी प्रस्तावित स्तर पर बताई जा रही है। पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, कर्ज की शर्तें, पहली किस्त की निश्चित तारीख और लाभार्थियों के चयन को लेकर अंतिम सरकारी दिशा-निर्देश का इंतजार है।
अगर योगी सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर लागू करती है, तो स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए यह प्रदेश की बड़ी आर्थिक पहल में शामिल हो सकती है। इससे महिलाओं को अपना कारोबार शुरू करने या मौजूदा काम को बढ़ाने के लिए बिना ब्याज पूंजी मिलने का रास्ता खुल सकता है।



