
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पार्टी छोड़कर जाने वाले राज्यसभा सांसदों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने कहा कि इन घटनाओं से पार्टी ने बड़ा सबक लिया है और अब भविष्य में राज्यसभा के लिए किसी व्यक्ति का चयन करते समय पहले से कहीं ज्यादा सावधानी बरती जाएगी।
केजरीवाल ने तंज कसते हुए कहा कि आगे से किसी व्यक्ति को राज्यसभा भेजने से पहले “सौ बार ठोंक-बजाकर देखेंगे” कि वह भरोसेमंद है या नहीं। उनके बयान को पार्टी छोड़ने वाले नेताओं और खास तौर पर राघव चड्ढा के संदर्भ में देखा जा रहा है।
राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने पर नाराजगी
केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी के लिए यह बेहद दुखद है कि जिन लोगों को पार्टी ने राज्यसभा भेजा, उनमें से कुछ ने बाद में पार्टी का साथ छोड़ दिया।

उन्होंने कहा कि राज्यसभा सांसदों को जनता ने सीधे नहीं चुना था, बल्कि पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। केजरीवाल के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी को भविष्य के लिए अपनी रणनीति और चयन प्रक्रिया पर दोबारा सोचने का मौका दिया है।
उनका कहना था कि अब राज्यसभा उम्मीदवार चुनते समय कई स्तर पर पड़ताल की जाएगी।
‘सौ बार ठोंक-बजाकर देखेंगे’
केजरीवाल ने अपने बयान में कहा कि आगे से राज्यसभा में किसी को भेजने से पहले यह देखा जाएगा कि संबंधित व्यक्ति कितना भरोसेमंद है और पार्टी के साथ उसकी निष्ठा कितनी मजबूत है।
उनका चर्चित बयान था—
“आगे से राज्यसभा में किसी को भेजने से पहले सौ बार ठोंक-बजाकर देखेंगे, आदमी ठीक है या नहीं।”
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे AAP के राज्यसभा सांसदों के हालिया घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
2013 का पुराना किस्सा भी सुनाया
केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के शुरुआती राजनीतिक दौर का जिक्र करते हुए 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उस चुनाव में AAP ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था और पार्टी को 28 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को 32 सीटें हासिल हुई थीं।
केजरीवाल के मुताबिक, सरकार बनाने के लिए भाजपा को चार विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय AAP के चार विधायकों को तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन वे पार्टी छोड़कर नहीं गए।
इसके बाद दोबारा चुनाव हुआ और AAP ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए 67 सीटें हासिल कीं।
गोवा और जम्मू-कश्मीर का भी जिक्र
केजरीवाल ने कहा कि पार्टी के चुने हुए प्रतिनिधियों ने कई राज्यों में अब तक जनता का भरोसा बनाए रखा है। उन्होंने गोवा, जम्मू-कश्मीर और गुजरात का उदाहरण देते हुए अपने दावे के समर्थन में अलग-अलग घटनाओं का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि 2022 में गोवा में AAP के दो विधायक चुने गए थे और उनके अनुसार दोनों को पार्टी से अलग करने की कोशिशों के बावजूद वे पार्टी के साथ बने हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर में AAP के एक विधायक का जिक्र करते हुए भी केजरीवाल ने दावा किया कि उन्हें पार्टी से अलग करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे अब तक AAP के साथ हैं।
गुजरात के उपचुनाव का उदाहरण
केजरीवाल ने गुजरात में AAP के विधायकों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के पांच विधायक चुनाव जीते थे, जिनमें से एक ने इस्तीफा दिया। इसके बाद हुए उपचुनाव में AAP ने भाजपा को हराया।
केजरीवाल ने कहा कि पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने जनता के साथ विश्वासघात नहीं किया है। उनके मुताबिक, राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने की घटनाएं AAP के लिए एक सीख हैं।
अब राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर ज्यादा जोर
केजरीवाल के बयान से साफ है कि पार्टी भविष्य में राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर अधिक सतर्क रहने का संदेश दे रही है। उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों के संदर्भ में नाराजगी जताते हुए कहा कि अब किसी को राज्यसभा भेजने से पहले उसकी निष्ठा और भरोसेमंद होने की क्षमता को ज्यादा गंभीरता से परखा जाएगा।
हालांकि, केजरीवाल के बयान में किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए राजनीतिक आरोपों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। यह उनके द्वारा व्यक्त राजनीतिक प्रतिक्रिया और पार्टी के अनुभवों पर आधारित बयान है।



