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भाटापारा में सुअरों की मौत का खुला राज, टेहका फार्म हाउस में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि; 1 KM तक बढ़ी निगरानी

भाटापारा। छत्तीसगढ़ के भाटापारा में टेहका रोड स्थित फार्म हाउस में सुअरों की लगातार हो रही मौतों की वजह सामने आ गई है। भोपाल भेजे गए सैंपल की जांच रिपोर्ट में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन और पशुपालन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में निगरानी और संक्रमण रोकने की कार्रवाई तेज कर दी है।

भाटापारा एसडीएम श्यामा पटेल ने जांच रिपोर्ट में बीमारी की पुष्टि होने की जानकारी दी है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद संबंधित फार्म हाउस को क्वारंटीन कर दिया गया है। पशु चिकित्सा विभाग की निगरानी में अब संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

लगातार हो रही थीं सुअरों की मौतें

टेहका रोड स्थित फार्म हाउस में सुअरों की लगातार मौत होने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद संदिग्ध बीमारी की जांच के लिए सैंपल भोपाल भेजे गए थे।

जांच रिपोर्ट आने के बाद अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई। बीमारी की जानकारी सामने आते ही प्रशासन ने फार्म हाउस को क्वारंटीन करने के साथ आसपास के इलाके में भी निगरानी बढ़ा दी।

अब तक प्रशासन ने क्या कदम उठाए?

  • प्रभावित फार्म हाउस को क्वारंटीन किया गया।
  • पशु चिकित्सा विभाग की निगरानी में कार्रवाई शुरू की गई।
  • फार्म हाउस के आसपास करीब 1 किलोमीटर के दायरे में निगरानी बढ़ाई गई।
  • सुअरों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है।
  • बीमारी के संभावित लक्षणों और अचानक होने वाली मौतों की जानकारी जुटाई जा रही है।
  • संक्रमित सुअरों के संबंध में निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

क्या है अफ्रीकन स्वाइन फीवर?

अफ्रीकन स्वाइन फीवर सुअरों में होने वाली एक गंभीर और अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है। यह बीमारी घरेलू और जंगली सुअरों को प्रभावित कर सकती है। संक्रमण फैलने की स्थिति में बड़ी संख्या में सुअरों की मौत हो सकती है।

हालांकि, अफ्रीकन स्वाइन फीवर इंसानों में संक्रमण नहीं फैलाता। इसलिए इस बीमारी को मानव स्वास्थ्य के लिए सीधे खतरे के तौर पर नहीं देखा जाता। इसका मुख्य प्रभाव सुअर पालन और पशुधन पर पड़ता है।

यही वजह है कि किसी फार्म में बीमारी की पुष्टि होने के बाद संक्रमण को दूसरे सुअरों तक पहुंचने से रोकने के लिए तत्काल नियंत्रण उपाय किए जाते हैं।

दूषित सामान और वाहनों से भी फैल सकता है संक्रमण

विशेषज्ञों के अनुसार, वायरस केवल संक्रमित सुअरों के संपर्क में आने से ही नहीं फैलता। संक्रमित या दूषित वस्तुओं के जरिए भी यह दूसरे स्थानों तक पहुंच सकता है।

संक्रमण के संभावित माध्यमों में शामिल हैं:

  • संक्रमित सुअरों का सीधा संपर्क
  • दूषित उपकरण
  • कपड़े और जूते
  • वाहन
  • अन्य संक्रमित सामग्री

इसलिए प्रभावित फार्म और आसपास के क्षेत्र में बायो-सिक्योरिटी यानी जैव-सुरक्षा उपायों का पालन बेहद जरूरी है।

आसपास के सुअर पालकों की बढ़ी चिंता

अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि के बाद आसपास के सुअर पालकों में भी चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि संक्रमण के संभावित मामलों की पहचान समय पर की जा सके।

पशुपालकों से कहा जा रहा है कि वे अपने सुअरों की सेहत पर लगातार नजर रखें। किसी पशु में असामान्य लक्षण दिखाई देने या अचानक मौत होने पर इसकी सूचना तुरंत पशु चिकित्सा विभाग को दें।

साथ ही पशुपालकों के लिए यह जरूरी है कि वे बाहरी लोगों, वाहनों और उपकरणों के फार्म में प्रवेश को लेकर सावधानी बरतें तथा साफ-सफाई और जैव-सुरक्षा के निर्धारित नियमों का पालन करें।

संक्रमण को फार्म हाउस तक सीमित रखना चुनौती

फार्म हाउस में बीमारी की पुष्टि के बाद प्रशासन और पशुपालन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण को प्रभावित क्षेत्र तक सीमित रखना है। इसके लिए आसपास के क्षेत्र में सुअरों की आवाजाही और बीमारी के संभावित लक्षणों पर नजर रखी जा रही है।

संक्रमित पशुओं के संबंध में भी निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की निगरानी में आगे के कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि बीमारी का प्रसार दूसरे सुअर पालन क्षेत्रों तक न पहुंच सके।

फिलहाल टेहका फार्म हाउस को लेकर प्रशासन सतर्क है और पशु चिकित्सा विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में निगरानी और जांच के आधार पर संक्रमण की स्थिति का आकलन किया जाएगा।

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