
दिल्ली, ठंड और त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही दिल्ली की हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने लगी है। 20 अक्टूबर को रावण दहन के बाद इसमें तेजी से बढ़ने की आशंका है। दिल्ली की हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंची तो रेखा गुप्ता सरकार भी एक्शन मोड में आ गई है। दिल्ली प्रदूषण के खिलाफ सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए जारी नियमों की निगरानी को बढ़ा दिया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सोमवार को दिल्ली नगरपालिका परिषद के विभिन्न क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान प्रदूषण के नियंत्रण के लिए निर्धारित नियमों का सही से पाल हो रहा है या नहीं, इसकी जांच की।
इस निरीक्षण का उद्देश्य ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) और विंट एक्शन प्लान के तहत जारी किए गए निर्देशों सही से पालन हो रहा या नहीं इसकी जांच करना था। इस दौरान पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अधिकाकरियों को लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
आज NDMC क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के इंतज़ामों का जायज़ा लेने के लिए अलग-अलग जगहों पर निरीक्षण किया। नियमों के तहत 3,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले निर्माण स्थलों और हाई राइज़ प्रोजेक्ट्स में एंटी-स्मॉग गन या वॉटर मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य है, ताकि धूल को मौके पर ही… pic.twitter.com/BUbcyt85N5
— Manjinder Singh Sirsa (@mssirsa) October 19, 2026
मनजिंदर सिंह सिरसा ने ऊंची इमारतों, वाणिज्यिक परिसरों, बड़े होटलों और विभिन्न निर्माण स्थलों में लगाए गए एंटी-स्मॉग गन और वॉटर मिस्ट सिस्टम की जांच की कि वो सही तरीके से संचालित हो रहे हैं या नहीं। मंत्री ने निर्देश दिया है कि जो इमारते नियमों का पालन नहीं कर रहे या निर्धारित मानकों के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए। मंत्री ने साफ किया है कि इस संबंध में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सिरसा ने बताया कि दिल्ली में बीएस-6 से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर एक नवंबर से निर्धारित प्रतिबंध लागू हो जाएंगे। साथ ही उन्होंने वाहन के मालिकों से अपील की है कि वो अपने साथ ध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) जरूर रखें।
ऊंची इमारतों पर खास नजर
दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के सख्त दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी निर्धारित की कमर्शियल, संस्थागत और हॉस्पिटैलिटी, जैसे होटल और बैंक्वेट हॉल की इमारतों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाना अनिवार्य होगा। ग्राउंड फ्लोर के साथ 5 मंजिला या उससे अधिक ऊंची इमारतों और 3000 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्रफल वाली इमारतों की निगरानी को सख्त कर दिया गया है।



