
दिल्ली सरकार ने अनाधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार अब ‘As-is Where-is’ आधार पर इन कॉलोनियों को नियमित करने और मालिकाना हक देने की प्रक्रिया को तेज कर रही है। इस योजना की जानकारी केंद्रीय मनोहर लाल खट्टर और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साझा की। सीएम रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस पहल से करीब 50 लाख लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
सीएम ने कहा कि यह कदम उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जो दशकों से इन कॉलोनियों में रह रहे हैं और अब उन्हें कानूनी रूप से अपने मकान और जमीन का मालिकाना हक मिलेगा। इसके तहत कॉलोनियों की स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा और नियमों के अनुसार उन्हें नियमित किया जाएगा।
2019 में अवैध कॉलोनियों के लिए प्रधानमंत्री की उदय योजना लागू की गई थी, जिसके तहत इन कॉलोनियों में बने भवनों को रेगुलराइज करने की प्रक्रिया शुरू हुई। उस समय लगभग 40 हजार मकानों का ही रेगुलराइजेशन हो पाया था, लेकिन योजना की गति धीमी रही। अब दिल्ली सरकार ने इस प्रक्रिया को और सुलभ और तेज बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लगभग 50 लाख निवासियों को इसका लाभ मिलेगा। योजना ‘As-is Where-is’ आधार पर लागू होगी, जिसका मतलब है कि कॉलोनियों को वर्तमान स्थिति में ही नियमित किया जाएगा और निवासियों को मालिकाना हक दिया जाएगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि इस कदम से निवासियों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और राजधानी के शहरी विकास को भी व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य है कि नियम सरल और पारदर्शी हों ताकि लंबी अटकी प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा सके।
1731 कॉलोनी में करीब 10 लाख घर
दिल्ली सरकार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारी डी थारा ने अनाधिकृत कॉलोनियों को आधिकारिक रूप से नियमित करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीएम उदय स्कीम 2019 में इस तरह की कॉलोनियों को नियमित करने की पहल की गई थी। वर्तमान में दिल्ली में लगभग 1,731 कॉलोनियों में करीब 10 लाख घर हैं। डी थारा ने बताया कि उस समय इस योजना में मकान मालिक को केवल मालिकाना हक मिलता था, लेकिन उसके भवन को आधिकारिक तौर पर वैध नहीं माना जाता था। इसे वैध बनाने के लिए लेआउट प्लान की आवश्यकता होती थी। इसके बिना भवन का आधिकारिक दर्जा नहीं मिल पाता था।
मकान आधिकृत कराने में आ रहीं दिक्कतें
दिल्ली में किसी भी बिल्डिंग को वैध बनाने के लिए एमसीडी में लेआउट प्लान की आवश्यकता होती है। लेकिन अधिकारियों के अनुसार, कई कॉलोनियों में आरडब्ल्यूएस (RWAs) इसे सही तरीके से तैयार नहीं कर पा रहे थे। इस वजह से समस्या यह थी कि कोई भी निवासी अपने मकान को रेगुलराइज नहीं कर पा रहा था। अब तक नियम के अनुसार, पूरे भवन को मिलकर लेआउट प्लान बनाना पड़ता था और फिर क्लियरेंस लेना होता था। लेकिन इसे पूरा करना जटिल और धीमा था, इसलिए कई लोग योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे थे।
अब नहीं होगी ले आउट प्लान की जरूरत
दिल्ली सरकार ने अनाधिकृत कॉलोनियों के रेगुलराइजेशन की प्रक्रिया को अब और सुलभ और सरल बना दिया है। अधिकारियों ने बताया कि अब किसी भी बिल्डिंग को वैध बनाने के लिए पूर्व में आवश्यक लेआउट प्लान की जरूरत नहीं है। यदि कोई निवासी अपनी बिल्डिंग को आधिकारिक रूप से रेगुलराइज कराना चाहता है, तो वह सीधे पीएम उदय योजना के तहत मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकता है। आवेदन के बाद क्लियरेंस मिलने पर, एमसीडी के सुगम पोर्टल पर जाकर अपनी बिल्डिंग का नक्शा तैयार करके अपलोड किया जा सकता है।
700 आर्किटेक्ट नक्शा तैयार करेंगे
दिल्ली सरकार ने अनाधिकृत कॉलोनियों में मकानों को आधिकारिक रूप से रेगुलराइज करने की प्रक्रिया के बारे में नई जानकारी साझा की है। अब लेआउट प्लान की आवश्यकता नहीं है। जिन निवासियों को अपनी बिल्डिंग रेगुलराइज करनी है, वे पीएम उदय योजना के तहत मालिकाना हक के लिए आवेदन करेंगे। आवेदन के बाद, एमसीडी के सुगम पोर्टल पर बिल्डिंग का नक्शा तैयार करना होगा। यह नक्शा लगभग 700 प्रशिक्षित आर्किटेक्ट तैयार करेंगे। नक्शा तैयार होने और क्लियरेंस मिलने के बाद बिल्डिंग को रेगुलराइज किया जाएगा और मकान आधिकारिक तौर पर आधिकृत हो जाएगा। इसके बाद मकान कानूनी एंटिटी बन जाएगा, जिससे मालिक अपने घर को लोन या अन्य वित्तीय कार्यों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।



