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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पेयजल और सिंचाई प्रबंधन पर सख्त निर्देश दिए

लखनऊ: प्रदेश में भीषण गर्मी और इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की आशंका को देखते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन-प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पेयजल आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था और राहत प्रबंधन में कोई भी शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी और सभी विभागों को परिस्थितियों का पूर्वानुमान करके अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश:

  1. पेयजल आपूर्ति:
    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि कहीं भी पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पाइप्ड पेयजल योजनाओं के साथ वैकल्पिक व्यवस्थाएं, जैसे टैंकरों को पूरी तरह से तैयार रखने का आदेश दिया। इसके साथ ही, वन विभाग को अभ्यारण्यों और पक्षी विहारों में वन्यजीवों के लिए जल व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया।
  2. सिंचाई प्रबंधन:
    मुख्यमंत्री ने किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सिंचाई तंत्र को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। सभी नलकूपों को क्रियाशील बनाए रखने, समय से मरम्मत सुनिश्चित करने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने की बात कही। जल के वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए, जल दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण रखने के निर्देश दिए गए।
  3. जल संरक्षण और नहरों की डी-सिल्टिंग:
    जल संरक्षण को गति देने के लिए नहरों, तालाबों और पोखरों की डी-सिल्टिंग 30 मई तक पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही, तालाबों से निकली मिट्टी को प्रजापति समाज और कुम्हार शिल्पकारों को निःशुल्क उपलब्ध कराने की बात कही गई, ताकि राहत कार्यों के साथ आजीविका के अवसर भी सृजित हो सकें।
  4. कृषि सुरक्षा और बीज वितरण:
    मुख्यमंत्री ने फसल सुरक्षा के तहत अनुदानित बीज वितरण और कृषि परामर्श के प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। उन्होंने फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया और किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने का आदेश भी दिया।
  5. आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सुरक्षा:
    मुख्यमंत्री ने आपदा मित्रों, होमगार्ड्स और सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए, ताकि आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। हीट स्ट्रोक, लू और गर्मी जनित बीमारियों से निपटने के लिए अस्पतालों में समुचित व्यवस्थाएं रखने का आदेश भी दिया गया।
  6. नहर प्रणालियों का प्रभावी संचालन:
    मुख्यमंत्री ने नहर प्रणालियों के प्रभावी संचालन और टेल फीडिंग के माध्यम से अंतिम छोर तक सिंचाई सुविधा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल की सीमित उपलब्धता के बावजूद वैज्ञानिक और संतुलित जल प्रबंधन अपनाते हुए, टेल क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाए।
  7. खाद की उपलब्धता और प्राकृतिक खेती:
    खाद की उपलब्धता पर नियमित मॉनिटरिंग और बफर स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए गए। उन्होंने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने का आदेश दिया, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

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