
नयी दिल्ली, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने शुक्रवार को कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम में से एक बन चुका है।
श्री नड्डा ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) संचालन समूह (एमएसजी) की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए मिशन की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने देश में मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना तैयार की है और अब अगले चरण में पूरे देश में इसके व्यापक उपयोग तथा नागरिक-केंद्रित, अंतरसंचालनीय और प्रौद्योगिकी आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच, मरीजों के उपचार की निरंतरता और नागरिकों को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित एवं सहमति-आधारित पहुंच उपलब्ध कराने में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने का प्रभावी माध्यम बनना चाहिए, ताकि प्रत्येक नागरिक को सरल, सुलभ और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
उन्होंने कहा कि कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम में से एक बन चुका है। अब तक 93.95 करोड़ से अधिक आभा नंबर जारी किये जा चुके हैं, जबकि 105 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से लिंक किये गये हैं। इसके अलावा 5.33 लाख स्वास्थ्य सुविधाएं और 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्री में पंजीकृत हो चुके हैं। मिशन के तहत 2.72 लाख स्वास्थ्य संस्थानों ने एबीडीएम सॉफ्टवेयर अपनाया है तथा ओपीडी पंजीकरण को आसान बनाने के लिए लगभग 24 करोड़ ‘स्कैन एंड रजिस्टर’ टोकन जारी किये गये हैं।
श्री नड्डा ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करना आवश्यक है और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र, राज्य सरकारों और सभी हितधारकों के सहयोग से देश में एक सुरक्षित, समावेशी, आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम का निर्माण होगा, जिससे प्रत्येक नागरिक को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जा सकेंगी।



