
मुख्यमंत्री ने छात्राओं को आधुनिक तकनीक का सही उपयोग करने, तनाव से दूर रहने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपने छात्र जीवन के अनुभव बताते हुए कहा कि मेहनत, अनुशासन और सीखने की इच्छा किसी भी व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
सरकारी स्कूल से मुख्यमंत्री तक का सफर साझा किया
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि वे भी सरकारी स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं। उस समय स्कूलों में आज जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन शिक्षा के प्रति लगन और मेहनत ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया।

उन्होंने छात्राओं से कहा कि आज के दौर में विद्यार्थियों को—
- बेहतर स्कूल भवन।
- स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं।
- आधुनिक शिक्षण संसाधन।
- सीखने के नए अवसर।
उपलब्ध हैं। इसलिए विद्यार्थियों को इन सुविधाओं का पूरा लाभ उठाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा जीवन बदलने वाली सबसे बड़ी शक्ति है और हर विद्यार्थी को इसे अपनी सफलता का आधार बनाना चाहिए।
स्कूल कैबिनेट की पहल की सराहना
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को विद्यालय में संचालित स्कूल कैबिनेट के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने कैबिनेट में शामिल छात्राओं को मंच पर बुलाकर उनसे बातचीत की।
छात्राओं ने अपनी जिम्मेदारियों के बारे में बताया, जिसमें—
- हेड गर्ल।
- डिप्टी हेड गर्ल।
- खेल गतिविधियां।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- अनुशासन व्यवस्था।
जैसी भूमिकाएं शामिल थीं।
मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्कूल स्तर पर ऐसी व्यवस्थाएं बच्चों में नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और जिम्मेदारी का भाव विकसित करती हैं।
छात्रा के सवाल पर बोले- AI मददगार है, विकल्प नहीं
संवाद के दौरान एक छात्रा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या वे ChatGPT और अन्य AI तकनीकों का उपयोग करते हैं।
इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वे नई जानकारियां जुटाने और विभिन्न कार्यक्रमों की तैयारी के लिए AI की सहायता लेते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि AI केवल एक सहायक माध्यम है, अंतिम निर्णय लेने की क्षमता इंसान की अपनी सोच और समझ पर निर्भर करती है।
उन्होंने छात्राओं को सलाह दी कि—
- AI से मिली जानकारी को आंख बंद करके स्वीकार न करें।
- तथ्यों की जांच जरूर करें।
- अपनी तार्किक सोच को मजबूत बनाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग ज्ञान बढ़ाने और बेहतर निर्णय लेने के लिए किया जाना चाहिए।
तनाव से बचने के लिए दी जीवनशैली की सलाह
एक छात्रा ने मुख्यमंत्री से मानसिक तनाव से बचने के उपाय पूछे। जवाब में उन्होंने कहा कि आज प्रतिस्पर्धा के दौर में तनाव सामान्य समस्या बन गई है, लेकिन सही दिनचर्या से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वे स्वयं—
- योग करते हैं।
- व्यायाम को महत्व देते हैं।
- संगीत सुनते हैं।
- पर्याप्त नींद लेने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि बेहतर सफलता के लिए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों जरूरी हैं।
भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा पर दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने छात्राओं से भारतीय संस्कृति और मूल्यों को जीवन में अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल तकनीकी और आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसके संस्कारों और मानवीय मूल्यों से भी होती है।
उन्होंने छात्राओं को—
- ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना।
- ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत।
- नैतिक मूल्यों।
को अपने जीवन में शामिल करने का संदेश दिया।
शिक्षकों से बोले- विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाएं
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को—
- विज्ञान।
- सेना।
- उद्यमिता।
- खेल।
- समाज सेवा।
- राजनीति।
- कृषि।
जैसे क्षेत्रों में करियर के अवसरों के बारे में जागरूक करने की अपील की।
शिक्षा, तकनीक और संस्कार से बनेगा भविष्य
‘किताब से कल तक’ कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को शिक्षा, नेतृत्व, तकनीक और जीवन प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश मिले।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक का सही उपयोग और मजबूत नैतिक मूल्य ही प्रदेश और देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं।


