Featureराष्ट्रीय

मध्य प्रदेश UCC रिपोर्ट में बड़ा सुझाव, आदिवासी समुदाय को समान नागरिक संहिता से बाहर रखने की सिफारिश

भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंप दी है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। समिति की रिपोर्ट अब कानून विभाग को भेज दी गई है, जहां आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सरकार की ओर से बताया गया है कि वरिष्ठ सचिवों की समिति द्वारा रिपोर्ट की समीक्षा और आवश्यक संशोधन के बाद UCC से जुड़ा विधेयक कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री को सौंपी गई रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति ने सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

इस अवसर पर समिति के कई सदस्य मौजूद रहे।

रिपोर्ट सौंपने के दौरान उपस्थित सदस्य—

  • प्रोफेसर गोपाल शर्मा
  • बुधपाल सिंह
  • शोभा पैठनकर
  • सदस्य सचिव अजय कटेसरिया

वहीं, समिति अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई और कुछ अन्य सदस्य व्यक्तिगत कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

तीन हिस्सों में तैयार की गई रिपोर्ट

UCC समिति की रिपोर्ट को तीन प्रमुख भागों में तैयार किया गया है। इसमें कानूनों के अध्ययन से लेकर जनता से मिले सुझावों तक को शामिल किया गया है।

पहला भाग: कानूनों और प्रथाओं का अध्ययन

रिपोर्ट के पहले खंड में 10 अध्याय शामिल हैं। इसमें—

  • अंतरराष्ट्रीय कानूनों का अध्ययन
  • देश के विभिन्न कानूनों का विश्लेषण
  • राज्य में लागू कानूनों और परंपराओं की समीक्षा
  • समिति की सिफारिशें

शामिल की गई हैं।

दूसरा भाग: UCC विधेयक का मसौदा

समिति ने एक प्रस्तावित विधेयक का प्रारूप भी तैयार किया है।

इस मसौदे में—

  • 4 भाग
  • 404 धाराएं
  • 7 अनुसूचियां

शामिल हैं।

यह मसौदा मध्य प्रदेश की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

तीसरा भाग: जनता से मिले सुझाव

समिति ने UCC को लेकर बड़े स्तर पर जनपरामर्श किया था। इस दौरान उसे 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए।

इन सुझावों का विश्लेषण—

  • जिला स्तर
  • राज्य स्तर
  • ऑनलाइन माध्यम

से किया गया।

रिपोर्ट में इन सुझावों का लिंग और समुदाय के आधार पर विश्लेषण भी शामिल किया गया है।

आदिवासी समुदाय को UCC से बाहर रखने की सिफारिश

समिति की सबसे महत्वपूर्ण सिफारिशों में से एक अनुसूचित जनजाति समुदाय को UCC के दायरे से बाहर रखना है।

समिति ने कहा है कि मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आदिवासी समुदाय की विशिष्ट परंपराओं और प्रथाओं को संरक्षित रखना जरूरी है।

विवाह, तलाक और संपत्ति जैसे विषयों का अध्ययन

राज्य सरकार ने समिति को व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी थी।

इन विषयों में शामिल थे—

  • विवाह
  • तलाक
  • भरण-पोषण
  • उत्तराधिकार
  • गोद लेना
  • लिव-इन रिलेशनशिप

समिति ने इन सभी विषयों पर मौजूदा कानूनों, सामाजिक प्रथाओं और संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन किया।

लैंगिक समानता पर जोर

समिति ने कहा है कि प्रस्तावित UCC में लैंगिक समानता को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही यह भी ध्यान रखा गया है कि विभिन्न समुदायों की मान्य परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों का संतुलन बना रहे।

रिपोर्ट में प्रमुख रूप से इन बातों पर जोर दिया गया है—

  • महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा
  • समानता का सिद्धांत
  • सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार कानून
  • संवैधानिक मूल्यों का पालन

विधानसभा में पेश हो सकता है विधेयक

राज्य सरकार अब रिपोर्ट की समीक्षा के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू करेगी। माना जा रहा है कि आवश्यक संशोधनों और कैबिनेट मंजूरी के बाद UCC विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

मध्य प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 20 जुलाई से प्रस्तावित है।

Related Articles

Back to top button