
भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के पेंशन प्रकरणों में होने वाली देरी पर अब सख्ती की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि पेंशन के अधिकार में किसी भी तरह का अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पेंशन प्रक्रिया को समयबद्ध और जवाबदेह बनाने के लिए वित्त विभाग ने ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निराकरण के लिए हर स्तर पर अधिकतम समय-सीमा निर्धारित कर दी है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल पेंशन प्रक्रिया को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनका पेंशन अधिकार समय पर मिले और किसी स्तर पर फाइल अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।
फाइल अटकी तो तय होगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा है कि निर्धारित समय-सीमा में पेंशन प्रकरण का निराकरण अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। यदि किसी स्तर पर तय समय के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही निर्धारित की जाएगी।

जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस व्यवस्था का सीधा उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है।
सेवानिवृत्ति से पहले ही तैयार होगा पेंशन प्रकरण
सरकार ने पेंशन प्रक्रिया को सेवानिवृत्ति के बाद शुरू करने के बजाय पहले से तैयार करने पर जोर दिया है। आगामी महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के अग्रिम पेंशन प्रकरणों में स्वीकृति की कार्रवाई निर्धारित प्रावधानों के अनुसार समय पर पूरी करनी होगी।
इससे कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद पेंशन शुरू होने में होने वाली संभावित देरी को कम किया जा सकेगा।
सामान्य पेंशन प्रकरण के लिए 15 कार्य दिवस
नई ऑनलाइन व्यवस्था में सामान्य नवीन पेंशन प्रकरण के लिए तीन अलग-अलग स्तर निर्धारित किए गए हैं।
प्रकरण को:
- क्रियेटर
- वेरीफायर
- एप्रूवर
के स्तर से गुजरना होगा।
तीनों स्तरों के लिए अधिकतम 5-5 कार्य दिवस निर्धारित किए गए हैं। इस तरह सामान्य नवीन पेंशन प्रकरण के लिए कुल 15 कार्य दिवस की समय-सीमा तय की गई है।
पुनरीक्षित पेंशन प्रकरण 10 दिन में होंगे पूरे
पुनरीक्षित पेंशन प्रकरणों के लिए प्रक्रिया को और तेज किया गया है। ऐसे मामलों में क्रियेटर को अधिकतम 4 कार्य दिवस में कार्रवाई करनी होगी।
इसके बाद:
- वेरीफायर के लिए 3 कार्य दिवस
- एप्रूवर के लिए 3 कार्य दिवस
निर्धारित किए गए हैं।
इस प्रकार पुनरीक्षित पेंशन प्रकरण को अधिकतम 10 कार्य दिवस में पूरा करना होगा।
वेतन निर्धारण के लिए 11 दिन की समय-सीमा
वेतन निर्धारण से जुड़े प्रकरणों के लिए भी समय-सीमा तय की गई है। क्रियेटर को अधिकतम 5 कार्य दिवस मिलेंगे, जबकि वेरीफायर और एप्रूवर को 3-3 कार्य दिवस में प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए कुल 11 कार्य दिवस की अधिकतम समय-सीमा निर्धारित की गई है।
हर स्तर पर तय होगी जवाबदेही
नई व्यवस्था में पेंशन फाइल को लंबे समय तक किसी एक स्तर पर रोककर रखने की गुंजाइश कम की गई है। क्रियेटर से लेकर वेरीफायर और एप्रूवर तक प्रत्येक स्तर के लिए स्पष्ट डेडलाइन तय होने से यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी प्रकरण में देरी किस स्तर पर हुई।
इसका फायदा यह होगा कि पेंशन प्रकरणों की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी और जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी।
2025 में हुआ था केंद्रीकृत पेंशन सेल का गठन
सरकारी कर्मचारियों के पेंशन प्रकरणों का तेजी से निराकरण करने के उद्देश्य से वित्त विभाग ने 9 जून 2025 के आदेश के माध्यम से राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल (SCPPC) का गठन किया था।
इसके बाद 1 अप्रैल 2026 से पूर्व की व्यवस्था समाप्त कर ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों का निराकरण SCPPC के माध्यम से किया जा रहा है।
इस केंद्रीकृत सेल को केवल नए पेंशन प्रकरणों के निराकरण की जिम्मेदारी नहीं दी गई है, बल्कि पुनरीक्षित पेंशन प्रकरणों की स्वीकृति और सेवानिवृत्ति से दो वर्ष पूर्व तक विभागीय सक्षम अधिकारियों द्वारा किए गए वेतन निर्धारण के अनुमोदन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
कर्मचारियों को समय पर मिलेगा पेंशन का लाभ
सरकार की नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लक्ष्य यही है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े। इसके लिए प्रक्रिया के प्रत्येक चरण की समय-सीमा तय की गई है।
नई व्यवस्था के तहत अब पेंशन प्रकरण किसी कार्यालय या अधिकारी के स्तर पर अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रह सकेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश और वित्त विभाग की नई समय-सीमा व्यवस्था के बाद अब पेंशन फाइल में देरी करने वाले जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार रहेगी। सरकार का संदेश साफ है—सेवानिवृत्त कर्मचारी का पेंशन अधिकार समय पर मिलना चाहिए और प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जवाबदेही तय होगी।



