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परिसीमन बिल पर मोदी सरकार का बड़ा दांव! मानसून सत्र में मिल सकती है ऐतिहासिक ‘खुशखबरी’

केंद्र की एनडीए सरकार एक बार फिर बहुचर्चित परिसीमन बिल को संसद में पेश करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि आगामी मानसून सत्र में यह विधेयक दोबारा सदन के पटल पर रखा जा सकता है। अगर राजनीतिक समीकरण अनुकूल रहे, तो इस बार सरकार इसे पास कराने में सफल हो सकती है।

इस मुद्दे को लेकर देश की राजनीति में लगातार हलचल बनी हुई है, खासकर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को देखते हुए सरकार संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।

क्या है सरकार की योजना?

सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार इस बार परिसीमन प्रक्रिया को नए स्वरूप में पेश कर सकती है, ताकि सभी राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

सरकार की संभावित योजना में शामिल है—

  • लोकसभा सीटों में कुल वृद्धि
  • दक्षिण और उत्तर राज्यों के बीच संतुलन
  • जनसंख्या के आधार पर नए परिसीमन का फॉर्मूला
  • राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी में बदलाव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में यह संकेत दिया था कि दक्षिणी राज्यों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी सीटों में भी समान रूप से वृद्धि पर विचार किया जाएगा।

पहले क्यों अटका था बिल?

अप्रैल में आयोजित विशेष संसद सत्र में यह बिल पास नहीं हो सका था। उस समय सरकार को आवश्यक बहुमत नहीं मिल पाया था।

उस स्थिति का गणित इस प्रकार था—

  • पक्ष में वोट: 298
  • विरोध में वोट: 230
  • जरूरी बहुमत: 352 (दो-तिहाई)
  • कमी: 54 वोट

यानी सरकार बहुमत से काफी पीछे रह गई थी।

अब क्यों बदल गए समीकरण?

अब राजनीतिक परिस्थितियां पहले से अलग मानी जा रही हैं।

  • कुछ दलों के सांसदों का समर्थन NDA को मिल सकता है
  • विपक्षी खेमे में आंतरिक मतभेद बढ़े हैं
  • कई सांसदों के पाला बदलने की चर्चाएं
  • मतदान के दिन अनुपस्थिति से भी आंकड़े प्रभावित हो सकते हैं

रिपोर्ट्स के अनुसार लोकसभा में NDA का समर्थन बढ़कर लगभग 319 सांसदों तक पहुंच गया है।

विपक्ष में बिखराव का असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी गठबंधन में दरारें सरकार के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।

  • कुछ दलों के सांसदों का समर्थन बदलना
  • गठबंधन में एकजुटता की कमी
  • वोटिंग के समय अनुपस्थिति की संभावना

ये सभी फैक्टर बिल के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।

दक्षिणी राज्यों की चिंता क्या है?

सरकार इस बार दक्षिणी राज्यों की आपत्तियों को गंभीरता से ले रही है।

  • आबादी आधारित सीट बढ़ोतरी का डर
  • राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असंतुलन की आशंका
  • क्षेत्रीय असमानता की चिंता

इन्हीं कारणों से सरकार संतुलन का नया फॉर्मूला तैयार कर रही है।

क्या इस बार पास हो सकता है बिल?

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार हालात पिछले सत्र की तुलना में अधिक अनुकूल दिख रहे हैं।

संभावित कारण—

  • NDA की मजबूत स्थिति
  • विपक्ष में बिखराव
  • कुछ दलों का तटस्थ रुख
  • वोटिंग गणित में संभावित बदलाव

अगर मतदान के दिन विपक्षी अनुपस्थित रहते हैं, तो जरूरी बहुमत का आंकड़ा भी कम हो सकता है।

क्यों अहम है परिसीमन बिल?

यह विधेयक देश की राजनीतिक संरचना को बदल सकता है—

  • लोकसभा सीटों का नया बंटवारा
  • राज्यों की राजनीतिक ताकत में बदलाव
  • केंद्र-राज्य संबंधों पर असर
  • अगले चुनावों का नया समीकरण

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