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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बड़ा बयान: 7 करोड़ लोगों की हुई स्क्रीनिंग, सिकल सेल उन्मूलन में भारत ने रचा इतिहास

भारत सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई लड़ रहा है और इस दिशा में देश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इसी क्रम में राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने अंतर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भारत के बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे स्क्रीनिंग अभियान की सराहना की और इसे दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य पहलों में से एक बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन को प्रभावित करने वाली चुनौती है। इसे समाप्त करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर व्यापक स्तर पर काम कर रही हैं।

क्या है सिकल सेल एनीमिया?

सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक (Genetic) रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार की बजाय हंसिया (Sickle) के आकार की हो जाती हैं। इससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है और मरीज को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

प्रमुख लक्षण

  • बार-बार शरीर में दर्द
  • अत्यधिक थकान
  • खून की कमी
  • संक्रमण का खतरा
  • अंगों को नुकसान पहुंचने की आशंका

7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग, समय से पहले पूरा हुआ लक्ष्य

राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत लगभग 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि यह दुनिया में जेनेटिक बीमारियों की पहचान के लिए चलाए गए सबसे बड़े अभियानों में शामिल है।

स्क्रीनिंग अभियान की प्रमुख उपलब्धियां

  • लगभग 7 करोड़ लोगों की जांच
  • नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष तक के लोगों को शामिल किया गया
  • करीब 2.5 लाख मरीजों में सिकल सेल बीमारी की पुष्टि
  • 20 लाख से अधिक कैरियर (वाहकों) की पहचान

मध्य प्रदेश बना अभियान का अहम केंद्र

राष्ट्रपति ने कहा कि Madhya Pradesh ने इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राज्य में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलाए गए “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के दौरान 4 लाख से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई। इससे बीमारी की समय रहते पहचान और उपचार में मदद मिली।

“सिकल मित्र” पहल बनी मिसाल

राष्ट्रपति ने मध्य प्रदेश सरकार की सिकल मित्र पहल की भी सराहना की।

इस कार्यक्रम के तहत:

  • स्वयंसेवी संगठनों को जोड़ा गया।
  • सरकारी और गैर-सरकारी प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया गया।
  • NCC कैडेट्स को जागरूकता अभियान में शामिल किया गया।
  • मरीजों और उनके परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई गई।

इस पहल ने ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य जागरूकता पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

सरकारों की संयुक्त कोशिशों की सराहना

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से मरीजों की समय पर पहचान संभव हो पाई है। साथ ही उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं और उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि केवल बीमारी की पहचान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कैरियर की पहचान और उनके लिए दीर्घकालिक स्वास्थ्य सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

2047 से पहले लक्ष्य हासिल करने का भरोसा

राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि सभी राज्यों के सहयोग और निरंतर प्रयासों से भारत वर्ष 2047 से काफी पहले सिकल सेल से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित करने और समाप्त करने के लक्ष्य को हासिल कर लेगा।

अभियान से होने वाले बड़े फायदे

  • बीमारी की समय पर पहचान
  • बेहतर उपचार और निगरानी
  • नवजात बच्चों की सुरक्षा
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता
  • आनुवंशिक रोगों की रोकथाम में मदद

भारत का यह अभियान न केवल देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी एक उदाहरण बनकर उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से प्रयास जारी रहे तो आने वाले वर्षों में सिकल सेल एनीमिया के मामलों में बड़ी कमी देखने को मिल सकती है।

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