
तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से उभर रही अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलझा वेत्री कड़गम (TVK) में अंदरूनी विवाद सामने आने लगा है। पार्टी ने अपनी एक महिला पदाधिकारी एम. ज्ञानसौंदरी को निष्कासित कर दिया है। ज्ञानसौंदरी ने पार्टी के कुछ नेताओं और मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
पार्टी की ओर से शनिवार को इस कार्रवाई की जानकारी दी गई। TVK ने आरोप लगाया कि ज्ञानसौंदरी ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश की और गलत आरोप लगाए।
भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद हुई कार्रवाई
TVK नेता एन. मोहनराज ने बताया कि एम. ज्ञानसौंदरी की प्राथमिक सदस्यता 17 जुलाई को ही रद्द कर दी गई थी। इसके साथ ही उन्हें पार्टी के सभी पदों से भी हटा दिया गया।
पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को भी निर्देश दिया है कि वे ज्ञानसौंदरी से किसी भी तरह का संपर्क न रखें।
पार्टी की ओर से लगाए गए आरोप:
- पार्टी की छवि खराब करने का प्रयास।
- विपक्षी दलों के साथ मिलकर काम करने का आरोप।
- नेताओं पर लगाए गए आरोपों को गलत बताया गया।
- संगठन विरोधी गतिविधियों के चलते कार्रवाई की गई।
महिला नेता ने लगाए थे गंभीर आरोप
एम. ज्ञानसौंदरी पेशे से वकील हैं और विधानसभा चुनाव के दौरान TVK की ओर से सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति में अनियमितताएं हुई हैं।
उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया था कि कुछ अस्थायी सरकारी वकीलों की नियुक्ति से पहले रिश्वत मांगी गई। इसी मामले को लेकर उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
उनके आरोपों में कुछ मंत्रियों और पार्टी नेताओं के नाम भी शामिल थे, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
ज्ञानसौंदरी की याचिका पर सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट ने आरोपों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।
कोर्ट के सामने सरकारी पक्ष ने बताया कि अस्थायी नियुक्तियां इसलिए की गईं क्योंकि नियमित नियुक्ति प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है।
अदालत ने यह भी कहा कि कुछ लोगों के नाम केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से जोड़े गए प्रतीत होते हैं।
विजय की भ्रष्टाचार विरोधी छवि पर असर
TVK प्रमुख विजय ने राजनीति में आने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की बात कही थी। उन्होंने हाल ही में भ्रष्टाचार की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया था।
विजय ने कहा था कि यदि कोई सरकारी अधिकारी रिश्वत मांगता है तो उसके खिलाफ शिकायत की जाए। उन्होंने अपने मंत्रियों को भी स्पष्ट निर्देश दिए थे कि भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऐसे समय में पार्टी की ही एक महिला नेता द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगाना TVK के लिए चुनौती बन गया है।
नई पार्टी के सामने पहली बड़ी परीक्षा
TVK अभी तमिलनाडु की राजनीति में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रही है। विजय की लोकप्रियता के कारण पार्टी को आगामी चुनावों में बड़ी उम्मीदों के साथ देखा जा रहा है।
हालांकि, पार्टी के अंदर से उठे इस विवाद ने संगठन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि TVK इस राजनीतिक संकट को कैसे संभालती है और विजय अपनी पार्टी की छवि को किस तरह बनाए रखते हैं।



