
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी की प्रलयकारी बाढ़ से चित्रकूट जिले में हुई तबाही का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को हवाई सर्वेक्षण कर जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री दोपहर में चित्रकूट पहुंचेंगे और हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे बाढ़ प्रभावित गांवों, क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और संपर्क मार्गों की स्थिति देखेंगे। हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री रामायण मेला परिसर पहुंचेंगे, जहां बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत किट वितरित की जाएगी।
करीब 20 दिनों तक बाढ़ की विभीषिका झेल चुके चित्रकूट में अब पानी उतरने के बाद नुकसान का आकलन और राहत-बचाव के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है। कई इलाकों में बाढ़ के निशान अभी भी दिखाई दे रहे हैं। रामघाट समेत जिले के 36 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। करीब 500 मकानों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इनमें 311 क्षतिग्रस्त मकानों के पीड़ित परिवारों को प्रशासन की ओर से मुआवजा दिया जा चुका है।
हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार दोपहर चित्रकूट पहुंचेंगे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया जाएगा।
हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्यमंत्री मंदाकिनी के आसपास के प्रभावित क्षेत्रों, गांवों, सड़कों और पुलों की स्थिति का जायजा लेंगे। बाढ़ के तेज बहाव से जिन इलाकों में सड़क और संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी स्थिति भी मुख्यमंत्री के सामने रखी जाएगी।
हवाई सर्वेक्षण के जरिए बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करने की कोशिश होगी।
रामायण मेला परिसर में राहत किट वितरण
हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री रामायण मेला परिसर पहुंचेंगे। यहां आयोजित कार्यक्रम में बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत किट वितरित की जाएगी।
बाढ़ के कारण प्रभावित हुए परिवारों के लिए राहत सामग्री तत्काल जरूरतों को पूरा करने में मददगार होगी। मुख्यमंत्री खुद पीड़ित परिवारों को राहत किट देकर सरकार की ओर से मदद का भरोसा देंगे।
कार्यक्रम के दौरान बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याओं और नुकसान से जुड़ी जानकारी भी मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जा सकती है।
20 दिन तक बाढ़ से जूझता रहा जिला
चित्रकूट जिले के कई इलाकों ने करीब 20 दिनों तक बाढ़ की स्थिति का सामना किया। मंदाकिनी नदी के जलस्तर में वृद्धि और तेज बहाव के कारण नदी के आसपास के क्षेत्रों में पानी फैल गया था।
बाढ़ का असर कम होने के बाद अब कई स्थानों पर सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि कुछ इलाकों में बाढ़ के निशान अब भी मौजूद हैं।
रामघाट सहित 36 गांवों में बाढ़ के प्रभाव के निशान देखे जा रहे हैं।
करीब 500 मकान क्षतिग्रस्त
बाढ़ से जिले में करीब 500 मकानों को नुकसान पहुंचा है। इनमें कुछ मकान पूरी तरह तो कुछ आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
मकानों को नुकसान पहुंचने के कारण कई परिवारों के सामने रहने और घर की मरम्मत की चुनौती खड़ी हुई है।
प्रशासन ने क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे कर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देना शुरू किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक 311 क्षतिग्रस्त मकानों के पीड़ितों को मुआवजा दिया जा चुका है।
311 परिवारों को मिल चुका मुआवजा
प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन करने के बाद 311 मकानों के प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है। इससे बाढ़ पीड़ितों को घरों की मरम्मत और जरूरी खर्चों में सहायता मिलने की उम्मीद है।
बाकी प्रभावित मकानों का आकलन और संबंधित प्रक्रिया भी प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाई जा सकती है।
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान बाढ़ से हुए नुकसान और मुआवजे की स्थिति की समीक्षा भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
सड़क और पुल भी हुए क्षतिग्रस्त
बाढ़ के दौरान नदी-नालों के तेज बहाव ने केवल मकानों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि सड़क, पुल और संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुए।
तेज पानी के कारण कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं और संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रशासन के सामने इन मार्गों को दोबारा दुरुस्त कर यातायात बहाल करने की चुनौती है।
बहाली कार्य पर सरकार का फोकस
अब बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सामान्य करना है। सड़क और पुलों की मरम्मत के साथ संपर्क मार्गों को बहाल करना जरूरी है।
जिन इलाकों में मकानों को नुकसान पहुंचा है, वहां प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर है।
मुख्यमंत्री के हवाई सर्वेक्षण से नुकसान के व्यापक स्तर की जानकारी सामने आने और बहाली कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
बाढ़ प्रभावित परिवारों से मिलेंगे सीएम
रामायण मेला परिसर में राहत किट वितरण के दौरान मुख्यमंत्री बाढ़ प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात कर सकते हैं। इससे पीड़ित लोग अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के सामने रख सकेंगे।
बाढ़ के कारण हुए नुकसान के अलावा राहत, मुआवजा और पुनर्निर्माण से जुड़ी जरूरतों की जानकारी भी प्रशासन और सरकार तक पहुंच सकती है।
मंदाकिनी की बाढ़ ने छोड़े तबाही के निशान
मंदाकिनी नदी की बाढ़ ने चित्रकूट के कई इलाकों को प्रभावित किया। करीब 20 दिनों तक बाढ़ की स्थिति रहने के कारण स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पानी उतरने के बाद अब बाढ़ की भयावहता के निशान सामने आ रहे हैं। कई गांवों में मकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान से स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
रामघाट और आसपास के इलाकों में बाढ़ के निशान अभी भी मौजूद हैं।
प्रशासन ने तेज किए राहत और पुनर्वास के प्रयास
जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के साथ नुकसान का आकलन किया जा रहा है। 311 क्षतिग्रस्त मकानों के पीड़ितों को मुआवजा दिया जाना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
अब सड़क, पुल और संपर्क मार्गों की मरम्मत के साथ प्रभावित लोगों के पुनर्वास और आवश्यक सहायता पर ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के दौरे से उम्मीदें बढ़ीं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चित्रकूट दौरा ऐसे समय हो रहा है जब जिला बाढ़ के बाद पुनर्बहाली के दौर में है। हवाई सर्वेक्षण के जरिए मुख्यमंत्री स्वयं बाढ़ से हुए नुकसान को देखेंगे।
इसके बाद रामायण मेला परिसर में राहत किट वितरण के माध्यम से प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाई जाएगी।
मुख्यमंत्री के दौरे से बाढ़ प्रभावित लोगों में सरकार से अतिरिक्त मदद और तेजी से पुनर्निर्माण की उम्मीद बढ़ी है।
चित्रकूट में अब चुनौती बाढ़ के पानी से निकलकर सामान्य जनजीवन की ओर लौटने की है। मकानों की मरम्मत, सड़कों और पुलों की बहाली तथा प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।



