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पीएम पैकेज कर्मचारियों ने अमित शाह से सुरक्षा चिंताओं के समाधान की मांग की

श्रीनगर, ऑल पीएम पैकेज एम्प्लाइज फोरम, कश्मीर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने तथा “एक और विस्थापन” की स्थिति बनने से रोकने की मांग की है।

फोरम ने कहा कि पिछले दो महीनों में सोशल मीडिया पर कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाते हुए कई कथित धमकी भरे पत्र सामने आये हैं। इन पत्रों के पीछे ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ नामक आतंकी संगठन का हाथ बताया गया है, जिसे पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन माना जाता है। फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने केंद्रीय गृह मंत्री को लिखे पत्र में कहा कि कश्मीर घाटी में रह रहे और काम कर रहे कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों तथा उनके परिवारों में “डर और अनिश्चितता की भावना बढ़ रही है।” उन्होंने कहा कि कर्मचारी पिछले 16 वर्षों से कश्मीर लौटकर अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित करने और अपनी मातृभूमि में बसने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन 2021 से नागरिकों और कश्मीरी हिंदू समुदाय के सदस्यों की लक्षित हत्याओं ने परिवारों में भय पैदा किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी हर घटना 1990 के दशक की दर्दनाक यादों को ताजा करती है और दोबारा विस्थापन की आशंका पैदा करती है। फोरम ने कहा कि भले ही स्थिति उपरी तौर पर सामान्य दिखाई देती हो, लेकिन जमीनी स्तर पर असहजता और तनाव बना हुआ है तथा कई परिवार अपनी सुरक्षा और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। फोरम ने हाल में कश्मीरी हिंदुओं और पीएम पैकेज कर्मचारियों को मिल रही कथित धमकियों को विशेष चिंता का विषय बताया। उसने कहा कि 1990 के दशक में भी धमकी भरे पत्र और नोटिस भय का शुरुआती संकेत बने थे, जिसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी हिंदुओं को घाटी से विस्थापित होना पड़ा था। फोरम ने हाल में पीएम पैकेज कर्मचारियों के लिए कश्मीर में अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की सरकारी पहल के बीच इस तरह की धमकियों को चिंताजनक बताया। उसने कहा कि कश्मीरी हिंदुओं और उनके आवासीय क्षेत्रों को लेकर हाल में सामने आये धमकी भरे संदेशों से कर्मचारियों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ी है। फोरम ने हाल की उन सरकारी पहलों का भी उल्लेख किया, जिनके तहत विस्थापितों की संपत्तियों और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में सरकारी पोर्टल के माध्यम से संपत्ति का विवरण एकत्र और सत्यापित किया जा रहा है। उसने कहा कि इससे कुछ विस्थापित परिवारों में अपनी सुरक्षा और संपत्ति अधिकारों को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। फोरम ने स्पष्ट किया कि उसकी चिंताएं किसी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं और उसकी मांगें सुरक्षा, सम्मान, न्याय तथा कश्मीर में शांतिपूर्वक रहने के अधिकार से जुड़ी हैं। फोरम ने हालिया धमकी भरे संदेशों की गहन जांच और धमकी, डराने या हिंसा के लिए उकसाने के दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। उसने पीएम पैकेज कर्मचारियों, उनके परिवारों और आवासीय कॉलोनियों के आसपास खुफिया जानकारी जुटाने और निवारक सुरक्षा उपाय मजबूत करने की भी मांग की। इसके अलावा, फोरम ने पीएम पैकेज आवासों और कॉलोनियों की व्यापक सुरक्षा समीक्षा, कर्मचारियों को धमकी की सूचना देने और समय पर सुरक्षा हासिल करने के लिए प्रभावी व्यवस्था तथा लक्षित धमकियों के किसी भी उभरते पैटर्न की करीबी निगरानी की मांग की। फोरम ने कहा, “हम एक और विस्थापन नहीं चाहते। हम कश्मीर में रहना, काम करना और सम्मान तथा सुरक्षा के साथ जीवन बिताना चाहते हैं।” फोरम ने केंद्र सरकार के कश्मीरी हिंदुओं के पुनर्वास और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता पर विश्वास जताते हुए संबंधित प्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियों को समय रहते आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की, ताकि मौजूदा भय का माहौल किसी और मानवीय संकट में न बदले। कश्मीर में पीएम पैकेज के तहत करीब 6,000 कश्मीरी पंडित कर्मचारी काम कर रहे हैं और सुरक्षा व्यवस्था के तहत ट्रांजिट कैंपों में रह रहे हैं।

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