
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय से जारी सैन्य तनाव के बीच एक बड़ा बदलाव सामने आया है। रक्षा मंत्रालय की ताजा सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान भारत से लगी उत्तरी सीमा के सामने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की तैनाती में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह बदलाव गलवान घाटी की झड़प के बाद सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार संवाद बढ़ा है। ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात भी हुई है। ऐसे में LAC पर चीनी सैनिकों की संख्या में कमी को दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव घटने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
2024 के डिसएंगेजमेंट के बाद अब डी-एस्केलेशन की दिशा
भारत और चीन के बीच वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद LAC पर दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात किए थे। इसके बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से तनाव कम करने की कोशिश की गई।

2024 में कुछ क्षेत्रों में डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में चीनी सेना की तैनाती में कमी का उल्लेख किया गया है। इसे सीमा पर डी-एस्केलेशन की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।
हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि LAC पर पूरी तरह तनाव समाप्त हो गया है।
अभी तीसरा चरण यानी डि-इंडक्शन बाकी
भारत की रणनीति को मोटे तौर पर तीन चरणों में देखा जा सकता है—
- डिसएंगेजमेंट: आमने-सामने तैनात सैनिकों को पीछे हटाना।
- डी-एस्केलेशन: सीमा पर सैनिकों और सैन्य संसाधनों की संख्या कम करना।
- डि-इंडक्शन: अतिरिक्त सैनिकों को सीमा क्षेत्र से हटाकर उनकी स्थायी बैरक या पीछे के ठिकानों पर भेजना।
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में चीनी सेना की तैनाती में कमी की बात सामने आई है, लेकिन अभी पूर्ण डि-इंडक्शन की प्रक्रिया बाकी मानी जा रही है। भारत चाहता है कि सीमा पर ऐसी स्थिति बने जिससे 2020 से पहले जैसी स्थिरता कायम हो सके।
LAC पर अभी भी बड़ी संख्या में चीनी सैनिक
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने LAC के विभिन्न हिस्सों में अपनी तैनाती घटाई है, लेकिन सीमा के आसपास उसके सैनिक और ट्रेनिंग एरिया अब भी महत्वपूर्ण संख्या में मौजूद हैं।
चीनी सेना की एक कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड को लगभग भारतीय सेना की एक डिवीजन के बराबर माना जाता है। इसमें सिर्फ पैदल सैनिक ही नहीं होते, बल्कि आधुनिक युद्धक क्षमताओं से जुड़े कई संसाधन भी शामिल होते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- इंफेंट्री यूनिट
- मैकेनाइज्ड वाहन और बख्तरबंद कॉलम
- आर्टिलरी सिस्टम
- एयर डिफेंस सिस्टम
- ड्रोन और अन्य आधुनिक युद्धक क्षमताएं
इसलिए सीमा पर केवल सैनिकों की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी त्वरित आवाजाही और सैन्य क्षमता भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
बॉर्डर के पास ट्रेनिंग एरिया भी बड़ी चुनौती
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह है कि LAC पर सीधे तैनाती कम होने के बावजूद चीन ने सीमा के करीब कई ट्रेनिंग क्षेत्रों में सैनिकों की मौजूदगी बनाए रखी है।
इस तरह की तैनाती चीन को जरूरत पड़ने पर सैनिकों को तेजी से LAC की ओर भेजने की क्षमता देती है। यही वजह है कि भारतीय सेना केवल सीमा पर आमने-सामने खड़े सैनिकों की संख्या घटने से संतुष्ट नहीं है।
भारत की प्राथमिकता अब अतिरिक्त चीनी सैनिकों के डि-इंडक्शन पर है, ताकि सीमा पर स्थायी रूप से तनाव कम किया जा सके।
अरुणाचल प्रदेश में अभी भी गतिरोध
पूर्वी क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी इलाके में भारत और चीन की सेनाओं के बीच फेस-ऑफ की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है।
इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के कोर कमांडर स्तर पर बैठकें हो चुकी हैं। हालांकि, सीमा के कुछ हिस्सों में तनाव अभी भी बना हुआ है।
इससे साफ है कि LAC पर सैन्य तैनाती कम होने के बावजूद भारत को सतर्क रहना होगा।
भारत-चीन बातचीत का दिख रहा असर
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर जारी संवाद का उत्तरी सीमा की स्थिति पर सकारात्मक असर पड़ा है।
भारत-चीन सीमा मामलों से जुड़े विभिन्न संवाद तंत्रों के साथ-साथ विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता का भी इसमें महत्व है। दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत का उद्देश्य सीमा पर स्थिरता बनाए रखना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क को भी इसी व्यापक कूटनीतिक प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जा रहा है।
गलवान के बाद बदली तस्वीर
2020 की गलवान घाटी की झड़प के बाद भारत और चीन ने LAC पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की थी। पूर्वी लद्दाख समेत कई संवेदनशील क्षेत्रों में सैन्य मौजूदगी बढ़ गई थी।
अब चीन की तैनाती में कमी का संकेत बताता है कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव को नियंत्रित करने की दिशा में प्रगति हुई है।
हालांकि, भारत के लिए चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। सीमा पर चीन की सैन्य क्षमता, बुनियादी ढांचे और त्वरित सैनिक आवाजाही की क्षमता को देखते हुए भारतीय सेना अपनी तैयारियों को मजबूत बनाए हुए है।
भारत के लिए इसका क्या मतलब?
- LAC पर चीनी सैनिकों की तैनाती में कमी तनाव घटने का संकेत है।
- 2024 के डिसएंगेजमेंट के बाद डी-एस्केलेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
- अभी पूर्ण डि-इंडक्शन होना बाकी है।
- सीमा के करीब चीन के ट्रेनिंग एरिया रणनीतिक चुनौती बने हुए हैं।
- अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में गतिरोध अभी भी जारी है।
- भारत सीमा पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अपनी सैन्य तैयारी बनाए हुए है।
कुल मिलाकर, रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट भारत-चीन सीमा पर तनाव कम होने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत देती है। लेकिन इसे LAC पर पूरी तरह सामान्य स्थिति की वापसी नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिरता तब मानी जाएगी, जब दोनों पक्ष अतिरिक्त सैनिकों और सैन्य संसाधनों को पीछे हटाकर सीमा पर स्थायी शांति और भरोसे की स्थिति स्थापित कर सकें।


