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CM योगी के रडार पर अब 7 SDM, दाखिल-खारिज और पैमाइश में लापरवाही पर होगी बड़ी कार्रवाई

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दाखिल-खारिज, वरासत, पैमाइश और जमीन-जायदाद से जुड़े राजस्व मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के बाद अब सात एसडीएम मुख्यमंत्री योगी के रडार पर आ गए हैं।

राजस्व मामलों के निस्तारण में खराब प्रदर्शन करने वाले इन अधिकारियों को चिह्नित कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों का जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।

RCCMS के आंकड़ों से सामने आया खराब प्रदर्शन

मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर राजस्व परिषद ने RCCMS यानी राजस्व कोर्ट कंप्यूटर मैनेजमेंट सिस्टम के आंकड़ों के आधार पर खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की पहचान की है।

चिह्नित अधिकारियों में लखनऊ की सरोजनीनगर और सदर तहसील के एसडीएम भी शामिल हैं। इसके अलावा मऊ के मधुबन और प्रतापगढ़ की कुंडा व रानीगंज तहसीलों के अधिकारियों का प्रदर्शन भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया है।

मुख्यमंत्री योगी ने पिछले दिनों राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अब खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है।

सरोजनीनगर में सिर्फ 4 फीसदी मामलों का निस्तारण

समीक्षा में सरोजनीनगर की एसडीएम (न्यायिक) का प्रदर्शन सबसे खराब पाया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 22 दिसंबर 2025 से 31 मई 2026 के बीच उनके न्यायालय में कुल 221 मामले दर्ज हुए।

इनमें से सिर्फ 9 मामलों का निस्तारण किया गया। इस तरह मामलों के निस्तारण की दर महज 4.07 फीसदी रही।

वहीं लखनऊ सदर तहसील के एसडीएम न्यायालय में इस अवधि में 1,000 मामले आए, जिनमें 403 मामलों का निस्तारण हुआ। यहां निस्तारण की दर 40.30 फीसदी रही।

इन तहसीलों के अधिकारी भी जांच के घेरे में

राजस्व परिषद की समीक्षा में कई अन्य अधिकारियों का प्रदर्शन भी अपेक्षित स्तर से कम पाया गया।

  • मधुबन, मऊ: 276 में से 55 मामले निस्तारित
  • कुंडा, प्रतापगढ़: 297 में से 80 मामले निस्तारित
  • रानीगंज, प्रतापगढ़: 418 में से 133 मामले निस्तारित
  • रानीगंज के एक अन्य न्यायालय में 558 में से 183 मामले निस्तारित
  • कुंडा की एसडीएम ने 1,247 में से 511 मामलों का निस्तारण किया

इन अधिकारियों से संबंधित जिलाधिकारियों को लिखित स्पष्टीकरण लेकर राजस्व परिषद को उपलब्ध कराने को कहा गया है।

23 सितंबर तक मुख्यमंत्री कार्यालय को जाएगी रिपोर्ट

राजस्व परिषद के आयुक्त और सचिव ने संबंधित जिलाधिकारियों को चिह्नित अधिकारियों के स्पष्टीकरण की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। पूरी रिपोर्ट 23 सितंबर तक मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपे जाने की बात कही गई है।

इसके बाद अधिकारियों के जवाब और प्रदर्शन के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला किया जा सकता है।

पहले ही 10 तहसीलदार और नायब तहसीलदार निलंबित

एसडीएम पर कार्रवाई की तैयारी से पहले ही राजस्व मामलों में लापरवाही को लेकर 10 तहसीलदार और नायब तहसीलदार निलंबित किए जा चुके हैं। वहीं 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

निलंबित अधिकारियों में संडीला हरदोई के तहसीलदार अमित यादव, देवरिया के तहसीलदार कृष्ण कुमार मिश्रा, जौनपुर के तहसीलदार सौरभ कुमार, अयोध्या के तत्कालीन नायब तहसीलदार और वर्तमान में गाजीपुर के तहसीलदार रंजन वर्मा तथा प्रतापगढ़ के तहसीलदार अलख शुक्ला शामिल हैं।

इससे पहले 1 सितंबर 2026 को चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया गया था।

जमीन से जुड़े मामलों में अब लापरवाही पड़ेगी भारी

मुख्यमंत्री योगी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राजस्व विभाग में लंबित मामलों पर खास नजर रखी जा रही है। दाखिल-खारिज, वरासत और पैमाइश जैसे मामलों का आम लोगों की जमीन और संपत्ति से सीधा संबंध होता है। ऐसे मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से लोगों को तहसीलों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा राजस्व अदालतों में लंबित वादों की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद अधिकारियों को मामलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए गए थे।

अब उसी अभियान के तहत पहले तहसीलदार और नायब तहसीलदार कार्रवाई के दायरे में आए और अब सात एसडीएम के प्रदर्शन की जांच हो रही है। अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद यह साफ होगा कि किन मामलों में विभागीय कार्रवाई की जरूरत है।

सरकार का संदेश साफ है कि राजस्व मामलों में देरी और लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

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