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हरिवंश को फिर से डिप्टी स्पीकर बनाने की तैयारी: विपक्ष ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली, राज्यसभा के उपसभापति पद को लेकर ताजा घटनाक्रम में हरिवंश नारायण सिंह के फिर से डिप्टी स्पीकर बनाए जाने की योजना सामने आई है। हरिवंश, जो पहले जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] के सांसद थे, इस बार मनोनीत सांसद के तौर पर राज्यसभा में पहुंचे हैं। उनका पिछले कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हुआ था, और 10 अप्रैल को उन्हें मनोनीत सदस्य के तौर पर शपथ दिलाई गई। अब उन्हें एक बार फिर राज्यसभा का उपसभापति बनाने की तैयारी की जा रही है।


हरिवंश का फिर से उपसभापति बनना: सरकार की तैयारी

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से चर्चा की थी, और उनका सुझाव था कि हरिवंश को एक बार फिर से उपसभापति बनाया जाए। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस पर असहमति जताई है। कांग्रेस, टीएमसी, और कुछ वाम दलों ने इस प्रस्ताव पर अपने विरोध का इज़हार किया है।

हरिवंश का नाम फिर से उपसभापति के रूप में प्रस्तावित किए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सरकार ने कहा है कि राज्यसभा में उपसभापति का पद भरने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए, और इसके लिए एक विशेष सत्र का आयोजन हो सकता है।


विपक्ष का सवाल: लोकसभा में 7 साल से डिप्टी स्पीकर का पद खाली, राज्यसभा में इतनी जल्दी क्यों?

विपक्षी नेताओं ने सरकार से सवाल किया है कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से खाली पड़ा है, लेकिन राज्यसभा में उपसभापति के लिए इतनी जल्दी क्यों दिखाई जा रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार लोकसभा में डिप्टी स्पीकर के चुनाव के लिए 7 सालों से कोई पहल नहीं कर रही है, लेकिन राज्यसभा में उपसभापति पद भरने के लिए इतनी जल्दी क्यों दिखा रही है।

टीएमसी के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार 17 अप्रैल को उपसभापति का चुनाव कराना चाहती है, जबकि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद सालों से रिक्त है। उन्होंने इसे संसद का मजाक बनाने की कोशिश बताया।


क्या है डिप्टी स्पीकर का पद?

राज्यसभा का उपसभापति या डिप्टी स्पीकर उच्च सदन के संसदीय कार्यों की देखरेख करता है और सदन की बैठकों के संचालन में मदद करता है। यह पद सदन में समन्वय और व्यवस्थित संचालन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। वहीं, लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का काम लोकसभा के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही को संचालन करना होता है।


राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव और विपक्ष की स्थिति

राज्यसभा के उपसभापति पद को भरने के लिए सरकार को विपक्षी दलों से सहमति की आवश्यकता होती है, लेकिन विपक्षी दलों ने अभी तक इस पर विरोध जताया है। अगर किसी सहमति पर नहीं पहुंचा जा पाता, तो चुनाव कराए जा सकते हैं। सरकार इस पद को भरने के लिए जल्द ही निर्णय लेने की प्रक्रिया में है, और एक विशेष सत्र का आयोजन भी हो सकता है।

इस मुद्दे पर विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार अपनी राजनीतिक इच्छाओं को आगे बढ़ाने के लिए इस पद के चुनाव में जल्दी कर रही है, जबकि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद पिछले कई वर्षों से रिक्त पड़ा है।

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