
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में सोमवार को ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत दो मादा चीते प्राकृतिक आवास में छोड़े गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़े बाड़े (बोमा) का गेट खोलकर चीते जंगल की ओर रवाना किए।
- जैसे ही गेट खोला गया, दोनों चीते तेजी से जंगल की ओर भागे।
- यह दृश्य वनकर्मियों, अधिकारियों और स्थानीय लोगों के लिए रोमांचक और प्रेरणादायक रहा।
प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य
- कूनो में अफ्रीकी चीतों को पुनर्वासित किया जा रहा है।
- उद्देश्य: भारत में विलुप्त हो चुके चीते की आबादी को पुनः स्थापित करना।
- यह परियोजना देश के सबसे महत्वाकांक्षी वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों में गिनी जाती है।
मुख्यमंत्री का संदेश
- मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश वन्यजीव संरक्षण में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
- चीतों को धीरे-धीरे जंगल में छोड़ा जा रहा है ताकि वे प्राकृतिक परिस्थितियों में अनुकूल हो सकें।
वन विभाग की निगरानी
- वन विभाग चीते के स्वास्थ्य, व्यवहार और गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा।
- यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चीते जंगल के वातावरण में सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से रह सकें।
कूनो नेशनल पार्क की भूमिका
- पहले से ही कूनो चीते पुनर्वास का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
- वन्यजीव संरचना और पर्यावरण चीते के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
- स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि यह पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
भविष्य की योजना
- वन विभाग की योजना है कि धीरे-धीरे और चीते जंगल में छोड़े जाएं, ताकि उनकी प्राकृतिक परिस्थितियों में अनुकूलता बढ़ सके।
- यह परियोजना मध्य प्रदेश को वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में मदद करेगी।



