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नोएडा को मिला इंटरनेशनल एयरपोर्ट, PM मोदी ने किया उद्घाटन

नोएडा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण (फेज-1) का उद्घाटन कर दिया है। इस एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रा करना आसान हो जाएगा, साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

करीब 11,200 करोड़ रुपए की लागत से बने इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) द्वारा विकसित और संचालित किया जा रहा है, जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। इस प्रोजेक्ट में केंद्र और राज्य सरकार की भी भागीदारी है।

यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का दूसरा सिविल एयरपोर्ट है और भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। इस एयरपोर्ट को मार्च 2026 में नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से एयरोड्रोम लाइसेंस मिल चुका है, जिसमें ‘ऑल वेदर ऑपरेशन’ की अनुमति दी गई है। इसका मतलब है कि यहां आधुनिक नेविगेशन सिस्टम, रनवे लाइटिंग और एयर ट्रैफिक सिस्टम मौजूद हैं, जिससे कम दृश्यता में भी विमान आसानी से उड़ान भर और उतर सकेंगे।

एयरपोर्ट की शुरुआती क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों की है, जिसे आगे चलकर 7 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है। पहले चरण में 3,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है, जो बड़े विमानों (वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट) को संभाल सकता है। इस रनवे के दोनों सिरों पर आईएलएस सिस्टम लगाया गया है, जिससे विमान हवा की दिशा के अनुसार किसी भी तरफ से लैंड कर सकते हैं।

रनवे के साथ आधुनिक लाइटिंग सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे रात और खराब मौसम में भी उड़ान संचालन सुचारू रूप से हो सके। इसके अलावा, यह एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट होगा जहां इन-हाउस मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा होगी। यहां कार्गो हैंडलिंग की क्षमता भी काफी बड़ी है, जो सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा माल संभाल सकेगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एनसीआर के लिए एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गेटवे के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे देश और विदेश के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और भारत के एविएशन सेक्टर को मजबूती मिलेगी।

यह एयरपोर्ट मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, जहां सड़क, रेल, मेट्रो और अन्य परिवहन सेवाओं का बेहतर तालमेल होगा, जिससे यात्रियों और माल ढुलाई दोनों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी।

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