
देवभोग, छत्तीसगढ़: पीडीएस चावल के काले कारोबार का मामला दिन-ब-दिन खुलता जा रहा है, लेकिन इसमें विभागीय अधिकारियों का रवैया अब तक सशक्त कार्रवाई करने का नहीं रहा है। पीडीएस चावल की अवैध खरीद-फरोख्त का गोरखधंधा कई महीनों से स्थानीय अधिकारियों के संरक्षण में चल रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारी मुनाफ़ाख़ोरों के सामने नतमस्तक दिखाई दे रहे हैं।
इस पूरे मामले में देवभोग, उरमाल, अमलीपदर, मैनपुर, कैंटपदर, बरकानी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पीडीएस चावल की चोरी हो रही है। इन चावलों का अवैध तरीके से कारोबार किया जा रहा है, जबकि इस पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही।
चावल के कारोबार में अधिकारियों का लापरवाहीपूर्ण रवैया
जैसे ही पीडीएस चावल के गोरखधंधे की परतें खुलीं, अधिकारी कुछ कार्रवाई करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मुनाफ़ाख़ोरों ने चावल को गौदामों और दुकानों से हटा कर अंदरूनी इलाकों में सुरक्षित कर लिया। अधिकारियों द्वारा की जा रही केवल “दिखावटी” कार्रवाई से स्थिति को रोकने में कोई सफलता नहीं मिल रही है।
कैसे चल रहा है पीडीएस चावल का काला कारोबार?
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मुख्य गांवों में खरीद-फरोख्त: देवभोग के आसपास के गांवों में जैसे कैंटपदर, घुमरगुड़ा, बरकानी, चावल खरीदी का कारोबार जोरों पर है।
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मुख्य रूप से देवभोग के कारोबारियों से कनेक्शन: इन गांवों के दुकानदारों का देवभोग मुख्यालय के बड़े कारोबारियों से सीधा संपर्क है। यह बड़े कारोबारी पीडीएस चावल खरीदी कर गौदामों में जमा करते हैं, फिर इन्हें मिलर्स के मिलों में भेज दिया जाता है।
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पॉलिश करके गैर-एफसीआई को बेचने की प्रक्रिया: चावल को पॉलिश करके नॉन-एफसीआई के नाम पर बेच दिया जाता है।
चावल बेचकर शराब की खपत
देवभोग के राशन कार्डधारी भी इन चावलों को बेचकर शराब पीने में लिप्त हैं। खासतौर पर बिजली विभाग के पास स्थित एक गौदाम में चावल आसानी से बिकता है, और उस पैसे से शराब की दुकानों पर शराब खरीदी जाती है। यह नजारा वितरण के दौरान अक्सर देखा जा सकता है, जो इस गोरखधंधे को और भी शर्मनाक बना देता है।
अधिकारियों के मूकदर्शक बनने की वजह
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन और खाद्य विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई न किए जाने से जनता का विश्वास कमजोर हुआ है। किसी भी कड़े कदम की बजाय अधिकारी केवल दिखावे की कार्रवाई करते दिख रहे हैं।
यह पीडीएस चावल का अवैध कारोबार केवल देवभोग ब्लॉक तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य इलाकों में भी तेजी से फैलता जा रहा है।
मंत्री से शिकायत की उम्मीद
चूंकि जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाई, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने गोपनीय तरीके से विभागीय मंत्री से शिकायत करने का फैसला किया है। इस शिकायत में पीडीएस चावल के काले कारोबार पर तुरंत रोक लगाने की मांग की जाएगी।
कैसे चल रहा है यह काला कारोबार?
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देवभोग मुख्यालय से 12 किमी दूर कैंटपदर में कई दुकानों में राशन कार्डधारी पीडीएस चावल बेचते हैं।
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घूमरगुड़ा और बरकानी में भी पीडीएस चावल का कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है।
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देवभोग में बिजली विभाग के पास स्थित बड़े गौदाम में भी चावल का कारोबार चलता है, जहां 200 मीटर दूर राशन दुकान है और वहां से चावल खरीदी के बाद उसे मिलर्स को भेज दिया जाता है।



