
मध्य प्रदेश के ग्रामीण विकास में ग्राम रोजगार सहायकों की भूमिका दिन-ब-दिन अहम होती जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय महासम्मेलन में इसे हनुमान के योगदान के समान बताया। उनका कहना है कि ये लोग ग्रामीण विकास और ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
ग्राम रोजगार सहायकों का महत्व:
- ग्राम विकास की धुरी: रोजगार सहायक ग्राम पंचायतों में विकास की मुख्य धुरी माने जाते हैं।
- डिजिटल इंडिया के सहायक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल भारत के सपनों को साकार करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
- योजनाओं का सीधा लाभ: ये लोग DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाते हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि ग्राम रोजगार सहायक और पंचायत सचिव दोनों मिलकर शासन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करते हैं। उनका योगदान केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान भी बुद्धि और युक्ति से करते हैं।
मुख्य बिंदु:
- ग्राम रोजगार सहायक समाज के महिला, किसान, युवा और गरीब वर्ग के लिए आदर्श हैं।
- रोजगार और आजीविका मिशनों को कार्यान्वित करने में इनकी भूमिका अहम है।
- प्रधानमंत्री मोदी के ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भर भारत के सपनों को हकीकत में बदलने में सहायक हैं।
- DBT के माध्यम से योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाने का श्रेय इन्हें जाता है।
ग्राम रोजगार सहायकों की उपलब्धियां:
- ग्रामीण विकास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना।
- जनता की समस्याओं का समाधान करना और पंचायत स्तर पर सहयोग प्रदान करना।
- डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुँचाना।
- ग्रामीण युवाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर प्रदान करना।
सीएम मोहन यादव ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार ग्राम रोजगार सहायकों के हितों की रक्षा और संवर्धन के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहेगी। उनका कहना है कि ये लोग ग्राम विकास की राह में मार्गदर्शक और प्रेरक के रूप में कार्य कर रहे हैं।
ग्राम रोजगार सहायकों की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर बनाने में हनुमान जैसी निष्ठा और समर्पण की मिसाल है। उनके योगदान से न केवल योजनाएं सफल हो रही हैं, बल्कि ग्रामीण जीवन स्तर में भी सुधार आ रहा है।



