
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब योजना के लाभार्थियों को सालभर में 9 की बजाय केवल 4 सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर मिलेंगे। इस फैसले का असर देश के करोड़ों गरीब परिवारों पर पड़ सकता है, जो रसोई गैस के लिए उज्ज्वला योजना पर निर्भर हैं।
सरकार के अनुसार यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति लागत में वृद्धि को देखते हुए लिया गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण भारत में गैस आयात की लागत बढ़ गई है। ऐसे में सरकार ने सब्सिडी की व्यवस्था में बदलाव किया है।
क्या बदला है?
उज्ज्वला योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी। इसका उद्देश्य गरीब परिवारों की महिलाओं को धुएं से मुक्त रसोई उपलब्ध कराना था।
समय के साथ सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में बदलाव हुआ है।
- शुरुआत में साल में 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते थे।
- बाद में यह संख्या घटाकर 9 कर दी गई।
- अब लाभार्थियों को केवल 4 सिलेंडरों पर ही सब्सिडी मिलेगी।
इसके बाद खरीदे जाने वाले सिलेंडर बाजार मूल्य पर लेने होंगे।
सरकार का क्या तर्क है?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश उज्ज्वला परिवारों की औसत वार्षिक खपत लगभग 4 सिलेंडर के आसपास है। इसलिए नई व्यवस्था वास्तविक उपयोग को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
सरकार का यह भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की कीमतों में तेजी आई है। आयात लागत बढ़ने के कारण सब्सिडी का बोझ भी बढ़ रहा था। ऐसे में सीमित संसाधनों के भीतर सहायता जारी रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
गरीब परिवारों पर क्या असर होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन परिवारों की गैस खपत अधिक है, उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता है। खासकर बड़े परिवारों में जहां खाना बनाने के लिए अधिक गैस की जरूरत पड़ती है, वहां खर्च बढ़ने की संभावना है।
संभावित प्रभाव:
- घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव।
- ग्रामीण क्षेत्रों में गैस उपयोग की गति प्रभावित हो सकती है।
- कुछ परिवार वैकल्पिक ईंधन की ओर लौट सकते हैं।
- मासिक रसोई खर्च में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
उज्ज्वला योजना का महत्व
उज्ज्वला योजना को देश की सबसे बड़ी सामाजिक कल्याण योजनाओं में गिना जाता है। इसके तहत करोड़ों महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। इस योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े कई सकारात्मक बदलाव भी लाए हैं।
हालांकि सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम होने के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि बढ़ती महंगाई के दौर में गरीब परिवारों को किस तरह राहत दी जाए।
आगे क्या?
सरकार ने संकेत दिए हैं कि वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार की स्थिति के आधार पर भविष्य में समीक्षा की जा सकती है। फिलहाल लाभार्थियों को नई व्यवस्था के अनुसार साल में केवल 4 सिलेंडरों पर सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों और घरेलू गैस खपत पर क्या प्रभाव पड़ता है।



