
नई दिल्ली। Amit Shah ने यमुना पुनर्जीवीकरण परियोजना की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यमुना की सफाई और पुनर्जीवन से जुड़े सभी कार्यों के लिए तय समय-सीमा निर्धारित की जाए और उनकी नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ, निर्मल और अविरल यमुना केंद्र तथा राज्य सरकारों का साझा संकल्प है, जिसे शीघ्र पूरा करने के लिए सभी एजेंसियों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा।
बैठक में यमुना नदी की सफाई, सीवेज प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और नदी संरक्षण से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। शाह ने कहा कि परियोजना की प्रगति का आकलन हर 20 दिन में किया जाएगा ताकि कार्यों में तेजी लाई जा सके और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो।
उन्होंने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को निर्देश दिया कि वे मिलकर यमुना में आवश्यक पर्यावरणीय प्रवाह (ईको-फ्लो) बनाए रखने की व्यवस्था करें। शाह ने कहा कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जल प्रवाह बेहद जरूरी है।
बैठक में डेयरियों से निकलने वाले अपशिष्ट को यमुना में जाने से रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसके तहत नगर निगम और संबंधित संस्थाओं के सहयोग से डेयरी एवं गौशालाओं के गोबर को बायोगैस और जैविक खाद संयंत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। इससे प्रदूषण कम करने के साथ-साथ ऊर्जा और जैविक खाद उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि यमुना में गिरने वाले नालों की डी-सिल्टिंग का कार्य लगभग 97 प्रतिशत पूरा हो चुका है और शेष कार्य 15 जून तक पूरा करने का लक्ष्य है। गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि निकाली गई गाद का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाए तथा उसका उपयोग निर्माण और अन्य परियोजनाओं में किया जाए ताकि वह दोबारा नदी में न पहुंचे।
शाह ने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार यमुना को प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियों को परिणाम-आधारित कार्यप्रणाली अपनानी होगी। साथ ही, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक का मुख्य संदेश यही रहा कि Yamuna River की सफाई केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पर्यावरणीय और जनहित का अभियान है, जिसके लिए समयबद्ध और समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।



