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West Bengal विधानसभा ने सोमवार को OBC आरक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव से जुड़े दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को मंजूरी दे दी। इन विधेयकों के पारित होने के बाद राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
विधानसभा में हुए मतदान के दौरान विधेयकों के पक्ष में 186 विधायकों ने मतदान किया, जबकि 17 सदस्यों ने विरोध किया। वहीं, छह विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे।
क्या हैं नए बदलाव?
राज्य सरकार के अनुसार, नए संशोधनों के बाद:
- OBC आरक्षण की व्यवस्था में पुनर्गठन किया जाएगा।
- बिना सर्वेक्षण के सूची में शामिल की गई 113 श्रेणियों को हटाया जाएगा।
- सर्वेक्षण और अध्ययन के आधार पर शामिल 66 उप-श्रेणियों को बरकरार रखा जाएगा।
- भविष्य में नई श्रेणियों को शामिल करने के लिए आयोग की सिफारिश जरूरी होगी।
सरकार का दावा- कोर्ट के आदेशों का पालन
राज्य सरकार की ओर से यह विधेयक Gourishankar Ghosh ने विधानसभा में पेश किया।
सरकार का कहना है कि यह कदम Calcutta High Court के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है और इसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है।
मंत्री के अनुसार:
- जिन 113 श्रेणियों को हटाया गया है, वे बिना फील्ड सर्वे के सूची में शामिल की गई थीं।
- जिन समुदायों के संबंध में सामाजिक और शैक्षणिक सर्वे उपलब्ध हैं, उन्हें सूची में बनाए रखा गया है।
पिछड़ा वर्ग आयोग की भूमिका बढ़ेगी
संशोधित व्यवस्था के तहत अब West Bengal Commission for Backward Classes की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
आयोग:
- किसी समुदाय की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन करेगा।
- OBC सूची में शामिल करने या हटाने की सिफारिश करेगा।
- आरक्षण के प्रतिशत निर्धारण को लेकर सुझाव देगा।
सरकार आयोग की सिफारिशों के आधार पर अंतिम निर्णय लेगी।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
विधेयकों को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं।
Nawsad Siddique ने आरोप लगाया कि संशोधन प्रक्रिया में सभी समुदायों के हितों को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया है।
विपक्ष की प्रमुख मांगें:
- सभी समुदायों का वैज्ञानिक और पारदर्शी सर्वे कराया जाए।
- आरक्षण संबंधी फैसले ठोस आंकड़ों के आधार पर लिए जाएं।
- सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का वस्तुनिष्ठ आकलन किया जाए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- इससे राज्य की आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव होगा।
- OBC वर्गीकरण की प्रक्रिया अधिक संस्थागत हो सकती है।
- भविष्य में आरक्षण से जुड़े फैसलों में आयोग की भूमिका बढ़ेगी।
- इस विषय पर कानूनी और राजनीतिक बहस आगे भी जारी रह सकती है।



