
नई दिल्ली : कांग्रेस ने सोमवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह कथित रूप से निजी लाभ के लिए किए गए एक बड़े भूमि घोटाले के “मास्टरमाइंड” हैं। पार्टी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अपना अभियान जारी रखेगी और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग करती रहेगी।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर एक पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधा। उन्होंने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि कथित भूमि घोटाले में मुख्यमंत्री की भूमिका प्रमुख रही है और इस मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री निजी लाभ के लिए किए गए इस बड़े भूमि घोटाले के मास्टरमाइंड हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले को लगातार उठाती रहेगी और मुख्यमंत्री को जवाबदेह ठहराने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
कांग्रेस का कहना है कि इस कथित मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोपों में सच्चाई सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी नेताओं का दावा है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है।
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटेगी। पार्टी का कहना है कि जब तक आरोपों को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आती, तब तक मुख्यमंत्री को नैतिक आधार पर अपने पद से हट जाना चाहिए।
हालांकि, इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्य सरकार की ओर से भी कांग्रेस के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में बयानबाजी और तेज हो सकती है। कांग्रेस इस मामले को प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में उठा रही है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष की प्रतिक्रिया का भी इंतजार किया जा रहा है।
कांग्रेस का आरोप है कि सार्वजनिक संसाधनों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप लगते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही सर्वोपरि है और इसी सिद्धांत के आधार पर वह इस मामले को आगे भी उठाती रहेगी।
इस बीच, राजनीतिक हलकों में कांग्रेस के आरोपों और मुख्यमंत्री के खिलाफ उठाई गई मांगों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने आया है। आने वाले दिनों में सरकार और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया के बाद इस मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकेगी।



