
नई दिल्ली में गुरुवार को आयोजित नौवीं आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक में खाद्य सुरक्षा, पोषण, किसानों की आजीविका और जलवायु परिवर्तन जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों पर चर्चा हुई। बैठक में भारत और आसियान देशों ने कृषि तथा वानिकी क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक की सह-अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और फिलीपींस के कृषि विभाग के सचिव फ्रांसिस्को पी. टियू लॉरेल ने की। बैठक के दौरान कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, मजबूत और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने की जरूरत पर विशेष जोर दिया गया।
खाद्य सुरक्षा और पोषण पर विशेष ध्यान
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसके लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय और आजीविका को सुरक्षित रखने की दिशा में भी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई।

भारत और आसियान देशों के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग का दायरा काफी व्यापक है। इसमें खाद्य उत्पादन, कृषि तकनीक, किसानों की आजीविका, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और वानिकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
जलवायु परिवर्तन के बीच टिकाऊ खेती जरूरी
बैठक में जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने पर भी विशेष चर्चा हुई। मौसम में हो रहे बदलावों का कृषि उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है। ऐसे में कम पानी, बेहतर तकनीक और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित इस्तेमाल वाली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना जरूरी माना गया।
बैठक में कृषि-वानिकी प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। कृषि और वानिकी को साथ लेकर चलने वाली ऐसी प्रणालियां किसानों की आय के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद कर सकती हैं।
भारत-आसियान रणनीतिक साझेदारी में कृषि की अहम भूमिका
मंत्रिस्तरीय बैठक में इस बात की पुष्टि की गई कि आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी में खाद्य, कृषि और वानिकी क्षेत्रों का महत्वपूर्ण स्थान है।
दोनों पक्षों ने माना कि कृषि क्षेत्र केवल खाद्य उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार, किसानों की आय और पर्यावरणीय स्थिरता से भी सीधे जुड़ा हुआ है।
बैठक में प्रमुख रूप से इन मुद्दों पर जोर दिया गया—
- खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना
- पोषण संबंधी चुनौतियों से निपटना
- किसानों की आजीविका को बेहतर बनाना
- जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना
- टिकाऊ कृषि प्रणालियों को मजबूत करना
- कृषि-वानिकी को प्रोत्साहित करना
- भारत और आसियान देशों के बीच कृषि सहयोग बढ़ाना
किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में दोनों क्षेत्रों के बीच तकनीक, अनुभव और बेहतर कृषि पद्धतियों का आदान-प्रदान किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी साझेदारी का महत्व और बढ़ गया है। टिकाऊ खेती, बेहतर प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और कृषि-वानिकी जैसी पहलें भविष्य में खाद्य सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत कर सकती हैं।
नौवीं आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक को इसी दिशा में भारत और आसियान देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



