
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि विकसित भारत का मतलब केवल सड़कों, रेलवे या अन्य बुनियादी ढांचे के आंकड़ों से नहीं है। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि मैं यह मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब सिर्फ सड़क-रेल या संरचना से जुड़े आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इसका मतलब यह भी है कि नीति निर्धारण में देश की आधी आबादी को हिस्सेदार बनाया जाए। हम पहले ही काफी देर कर चुके हैं। इसे अब सभी को स्वीकार करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि जब हम अकेले में मिलते हैं तो यह मान लेते हैं कि हां, यह जरूरी है। लेकिन जो लोग केवल राजनैतिक दिशा में सोचते हैं, उनसे मैं मित्र के रूप में एक सलाह देना चाहता हूं जो उनके काम आएगी।
इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हमें देश की आधी आबादी को राष्ट्र निर्माण की नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिल रहा है। हम सभी सांसद इस ऐतिहासिक अवसर को हाथ से न जाने दें। हम सब मिलकर देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह न केवल देश की महिलाओं के सशक्तिकरण को नई ऊंचाई देगा, बल्कि देश की राजनीति की दशा और दिशा भी तय करेगा।
नंबर गेम नहीं है NDA के साथ
संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या के दो तिहाई के समर्थन की जरूरत होती है। अब NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के पास लोकसभा में यह आंकड़ा फिलहाल नहीं है। ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लिए विपक्ष की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
परिसीमन के बाद बढ़ जाएंगी सीटें
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए गुरुवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी एक विधेयक तथा इनसे संबंधित केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 लाने की तैयारी में है।



