
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को 1998 में किए गए पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए कहा कि इस अभियान ने भारत के ‘अटल संकल्प’ को प्रदर्शित किया।
- उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि यह परीक्षण दुनिया को दिखाने वाला क्षण था कि कोई भी बाहरी दबाव भारत को झुकने पर मजबूर नहीं कर सकता।
- मोदी ने कहा, “11 मई 1998 को हुए परीक्षणों के बाद पूरी दुनिया भारत पर दबाव बना रही थी, लेकिन हमने दिखा दिया कि हमारी शक्ति और संकल्प अटल है।”
ऑपरेशन शक्ति: भारत की रणनीतिक मजबूती
- इस अभियान को ‘ऑपरेशन शक्ति’ के नाम से जाना जाता है।
- 11 और 13 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण परीक्षण क्षेत्र में पाँच भूमिगत परमाणु हथियारों का परीक्षण किया गया।
- यह परीक्षण भारत को घोषित परमाणु संपन्न देश के रूप में स्थापित करने वाला ऐतिहासिक क्षण था।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चुनौती
- पोखरण परीक्षण के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव और प्रतिबंध लागू किए गए, विशेषकर अमेरिका और जापान की ओर से।
- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में इस निर्णय को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए जरूरी बताया गया।
- इस कदम ने भारत की रणनीतिक और रक्षा नीति को मजबूत आधार दिया।
भारत की परमाणु नीति पर प्रभाव
- द्वितीय पोखरण परीक्षण ने भारत की रणनीतिक सिद्धांतों में निर्णायक मोड़ डाला।
- भारत की दीर्घकालिक परमाणु नीति में शामिल हैं:
- विश्वसनीय न्यूनतम निवारण
- पहले उपयोग न करने का सिद्धांत
- यह परीक्षण भारत की राष्ट्रीय शक्ति, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता का प्रतीक बन गया।



